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उज्जैन सिंहस्थ मेले का दृश्य, हजारों श्रद्धालु, सड़कों और मेला क्षेत्र में लगे आधुनिक दिशा-सूचक स्मार्ट साइनेज बोर्ड,

सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को राह दिखाएंगे स्मार्ट साइनेज

आगामी सिंहस्थ मेले के लिए उज्जैन में स्मार्ट साइनेज सिस्टम लागू किया जाएगा। शहर और मेला क्षेत्र में एक जैसे दिशा-सूचक बोर्ड लगाकर श्रद्धालुओं को आसान नेविगेशन और बेहतर भीड़ प्रबंधन की सुविधा दी जाएगी।

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मालवा में संजा पर्व के दौरान किलाकोट बनाती ग्रामीण किशोरियां

संजा: वह दीवार, वे गीत और जीजी के पीछे-पीछे चलता मेरा बचपन

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज़, पुणे शाम होते ही गांव की गलियों में एक अलग ही हलचल शुरू हो जाती थी. घरों के चूल्हों से उठता धुआं धीरे-धीरे आसमान में घुलता, गाय-बछड़े लौटकर अपने ठिकानों पर पहुंचने लगते और खेतों से आती हवा में मिट्टी की सोंधी गंध घुल जाती. इसी समय मेरी बड़ी…

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किस विध लूँ तेरी थाह

यह कविता एक गहरी, रहस्यपूर्ण और रूमानी अभिव्यक्ति है — प्रेम में डूबे एक हृदय की उस छटपटाहट और जिज्ञासा की, जो अपने प्रिय की भावनाओं, मौन संकेतों और अस्तित्व को पूरी तरह समझना चाहता है। शीर्ष पंक्ति “किस विध लूँ तेरी थाह प्रिय” पूरे काव्य का केंद्रीय भाव है — यह प्रश्न नहीं, एक आकुल जिज्ञासा है, एक समर्पण है।

कविता में प्रिय को एक ऐसी नदी के रूप में देखा गया है, जो सतह पर तो लहराती, मुस्कराती, बलखाती दिखती है, लेकिन भीतर कहीं गहराई में कई सदियों से प्यासेपन की पीड़ा को संजोए हुए है। वह प्रिय किसी दरिया से मिलन नहीं चाहता, फिर भी एक अनकहा प्रवाह है, जो उसे बहाए लिए जाता है — यही वह विरोधाभास है जिसे कवि समझना चाहता है।

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भ्रम : एक म्यान दो तलवारें

राम “और ” श्याम ” नाम रखूंगी भाभीजी – मेरे भी आंगन में किलकारी गूंजेगी , मेरी गोद से नहीं तो क्या हुआ ! छोटी की गोद से सही ।
बस, पांडे जी को खुश देखना चाहती हूं ।
अपने ही पति की सेज सजाई पंडिताइन ने – घर में किलकारी भी गूंजी …….
लेकिन अपने हाथों अपनी बगिया …

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अपनी बारी

ऑटो से उतारना, पसीना पोंछना, पानी पिलाना और कंधे पर भार उठाकर घर ले जाना—सास के लिए बहू का यह समर्पण रोज़ देखने को मिलता था। पूछने पर उसने मुस्कुराकर कहा, “मेरे बच्चों को इन्होंने फूल जैसा पाला है… अब मेरी बारी है।”

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महिदपुर रोड पर घना कोहरा और हल्की फुहारें

महिदपुर रोड पर घना कोहरा और हल्की फुहारें

महिदपुर रोड पर सर्दियों का पहला असली झटका महसूस हुआ. घना कोहरा और हल्की फुहारों ने शहर को जादुई रूप दिया. मौसम विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने सावधानी बरतने की चेतावनी दी.

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आइना पूछता है…

आइना अब मुझसे पूछता है कि मैं कौन हूँ, किसकी तस्वीर हूँ। मेरा चेहरा तो सामने है, लेकिन मेरी परछाईं में किसी और की तासीर बसती है। पलकों पर ठहरे मौसम और होठों पर आधी मुस्कान—यह सब उसने छोड़ा था, शायद किसी अनकहे ग़म की पहचान के तौर पर। हर दिन सवेरा आता है, लेकिन उजियारा अधूरा-सा लगता है। रास्ते वही हैं, कदम वही हैं, पर मन अब पूरा नहीं लगता। मेरे भीतर यादों का एक घर है, जहाँ खामोशियाँ अपनी भाषा में बोलती हैं। जब मैं आइने में खुद को देखता हूँ, तो लगता है कि वह अब भी मुझमें कहीं डोलती हैं। शायद इसी वजह से आइना एक दिन डर गया—कैसे दिखाए वो सूरत, जो अब किसी और के असर में जी रही है।

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राजस्थान में मौसम बदला, अलवर-सीकर में कोहरा

राजस्थान में मौसम ने फिर करवट ली है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस खत्म होने के साथ ही उत्तर-पश्चिमी हवाओं का असर शुरू हो गया है। मंगलवार की रात के न्यूनतम तापमान में गिरावट के कारण ठंड और तेज हो गई। सीकर में मंगलवार को रिकॉर्ड 2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

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बालकनी में बैठी एक महिला अपनी दिवंगत माँ को याद करते हुए भावुक संस्मरण लिख रही है, पीछे रात का शांत वातावरण दिखाई दे रहा है।

“हर हिस्से की गूँज है माँ”

माँ केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की सबसे गहरी गूँज होती है। “हर हिस्से की गूँज है माँ” एक बेटी की भावुक स्मृतियों से बुना गया ऐसा संस्मरण है, जिसमें माँ के प्रेम, अनुशासन, त्याग, संवेदनाओं और बिछड़ने के दर्द को बेहद आत्मीयता से व्यक्त किया गया है। यह लेख हर उस व्यक्ति के दिल को छू जाएगा, जिसने अपनी माँ के स्नेह को महसूस किया है।

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