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चाहत

कई वर्षों तक जिम्मेदारियों के बोझ तले दबी मेरी पढ़ाई की इच्छा आज फिर से सिर उठाने लगी है। उम्र पचास पार कर चुकी है, पर मन में अभी भी उम्मीद की लौ जल रही है। कभी मेधावी छात्रा रही मैं, जीवन की उलझनों में खुद को कहीं खो बैठी थी। कर्तव्य और परिवार ने हमेशा पहला स्थान पाया, और मेरी इच्छाएँ पीछे छूटती गईं।

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ना रोक खुद को अब…

हर कठिनाई से लड़ने की ताकत रखती है तू, तो फिर सुन स्त्री, अब अपने स्त्री होने पर शर्म नहीं, गर्व किया कर। जहाँ मन लगे, वहाँ दिल लगाना तेरा अधिकार है, और आईने में मुस्कुराकर खुद को पहचानना भी। तू सिर्फ जिम्मेदारियों में नहीं, हक़ में भी जी सकती है – खुद से प्यार कर, खुद को सजा, और दुनिया को दिखा कि तू क्या है।”

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गंध अतीत की

अरसे बाद जब मैंने अपनी यादों से भरी डायरी खोली, तो एक अजीब-सी गंध ने मुझे घेर लिया — जैसे बीते हुए दिनों की धूल ने अचानक साँसों में जगह बना ली हो। हर पन्ना, हर शब्द, किसी पुराने खंडहर की दीवार-सा झरता हुआ लगा। मैं उन पलों को छूना नहीं चाहती थी, फिर भी वे मुझे अपने भीतर समेटने लगे। अतीत का हर कोना एक कहानी था — अधूरी, चुभती हुई, फिर भी ज़िंदा।

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नानी के गांव में आम के पेड़ के नीचे पुराने टिन के डब्बे को खोजते हुए बच्चे, साथ में मुस्कुराती नानी और गर्मियों की यादों से भरा ग्रामीण वातावरण।

गर्मी की छुट्टियां

यह बाल कहानी आरव की गर्मी की छुट्टियों, नानी के गांव और दोस्ती के खजाने की खोज के जरिए बच्चों को यादों, मित्रता और खुशियां बांटने का सुंदर संदेश देती है।

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प्रकृति के बीच अकेली स्त्री, घास पर बैठी आसमान की ओर देखती हुई, आत्मचिंतन का शांत दृश्य

फिर कभी न लौटने के लिए…

“फिर कभी न लौटने के लिए…” एक गहन भावनात्मक और दार्शनिक कविता है, जिसमें कवयित्री तन्हाई, प्रकृति और आत्म-अन्वेषण के माध्यम से जीवन के गूढ़ प्रश्नों को समझने की कोशिश करती है। यह कविता आत्मा की शांति और अस्तित्व की खोज का संवेदनशील चित्रण है।

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उज्जैन रेलवे स्टेशन पर साइलेंट अटैक से बुजुर्ग की मौत

उज्जैन रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर ट्रेन का इंतजार कर रहे 66 वर्षीय बुजुर्ग की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई. डॉक्टरों के अनुसार यह मामला साइलेंट अटैक का है, जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के जानलेवा साबित हो सकता है.

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रामलीला: एक प्रतीक्षा, एक परंपरा, एक अपनापन

साल 1977 की यह रामलीला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि महिदपुर रोड की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान थी। रंग-बिरंगे पर्दों, अनुशासनपूर्ण व्यवस्था और जीवंत पात्रों वाली यह रामलीला आज भी स्मृतियों में जीवित है, जब लोग दोपहर में ही रात की सीट बुक करने चले जाते थे, और हनुमानजी का प्रसाद पूंछ से मिलता था।

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चिंता छोड़, सार्थक चिंतन की ओर

“चिंता सचमुच चिता समान है। जीवन की अनहोनी को रोका नहीं जा सकता, पर छोटी-बड़ी चिंताओं से कैसे निपटना है, यह हमारे हाथ में है। मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र और शत्रु उसका मन ही है—इंद्रियों के मोह में फँसा तो बंधन, और निर्विकार रहा तो मुक्ति। आँखें, कान, हृदय और मस्तिष्क—ये सब मिलकर हमारी चिंताओं का जाल बुनते हैं। गीता हमें सिखाती है कि सकारात्मक चिंतन और समदृष्टि अपनाकर ही मनुष्य चिंता से चिंतन की ओर बढ़ सकता है। मन का घर तभी स्वस्थ है जब उसमें प्रेम और संतुलन हो।”

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जुन्नर से गुजरात: 50 तेंदुए जा रहे नए घर

जुन्नर (महाराष्ट्र) से गुजरात तक तेंदुओं का बड़ा “मूवमेंट” होने वाला है। केंद्रीय प्राणी संग्रहालय प्राधिकरण ने 19 दिसंबर को महाराष्ट्र के जुन्नर वन विभाग के 50 जंगली तेंदुओं को गुजरात के ग्रीन प्राणी शास्त्रीय बचाव और पुनर्वास केंद्र में स्थानांतरित करने की मंजूरी दी है। इस निर्णय से जुन्नर वन क्षेत्र के मानव-वन्यजीव संघर्ष में राहत मिलने की उम्मीद है।

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सावन सोमवार पर हास्य व्यंग्य लेख, शिव भक्ति और जीवन का संदेश

सावन सोमवार और रिश्तों की तलाश

सावन सोमवार आते ही व्रत, पूजा और मनचाहे वर की कामनाओं का दौर शुरू हो जाता है। लेकिन क्या सिर्फ उपवास से जिंदगी की खुशियां मिल जाती हैं? एक हल्के-फुल्के अंदाज में यह व्यंग्य बताता है कि खुद को बेहतर बनाना, अच्छे कर्म करना और जीवन का आनंद लेना भी उतना ही जरूरी है।
सावन का मजा लीजिए, भक्ति को सच्चे मन से निभाइए और खुद को इतना काबिल बनाइए कि खुशियां खुद आपके दरवाजे तक आएं।

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