रजनीगंधा-सी तुम
रजनीगंधा की भीनी-भीनी खुशबू की तरह कुछ प्रेम दिल में हमेशा महकते रहते हैं। यह छोटी-सी कविता मिलन की खुशी, विरह की कसक और हर बिछड़न के बाद फिर से खिल उठने वाले प्रेम का एहसास कराती है।

रजनीगंधा की भीनी-भीनी खुशबू की तरह कुछ प्रेम दिल में हमेशा महकते रहते हैं। यह छोटी-सी कविता मिलन की खुशी, विरह की कसक और हर बिछड़न के बाद फिर से खिल उठने वाले प्रेम का एहसास कराती है।
किसी की ज़िंदगी में शामिल होने, उसके मन की ख़ामोशी समझने और उसके ख़्वाबों में जगह पाने की चाह को व्यक्त करती एक संवेदनशील प्रेम कविता।
दुनिया की चिंताओं से दूर, बादलों के पार अपना एक घर बसाने का ख़्वाब। यह प्रेम कविता उस दिल की आवाज़ है, जो अधूरे सपनों और अनकही भावनाओं के सहारे आज भी प्रेम में जी रहा है।
कभी कोई लौटकर सिर्फ एक बार मुड़कर देख ले, तो बरसों की रंजिशें मिट सकती हैं। यह कविता प्रेम, इंतज़ार, विरह और बीते पलों की उन यादों को स्वर देती है, जो आज भी दिल में जीवित हैं।
मेरे हिस्से की पीड़ाएँ मुझे स्वीकार हैं, क्योंकि संघर्ष से घबराना मेरी प्रकृति नहीं। प्रेम, त्याग और आत्मबल से भरी यह कविता जीवन के हर रण में स्वयं पर विश्वास रखने की बात करती है।
विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ना आसान नहीं होता। यह कविता संघर्ष, परिवर्तन, प्रेम और असंभव लगने वाली परिस्थितियों के बीच उम्मीद की तलाश को अभिव्यक्त करती है।
जब प्रेम केवल स्पर्श नहीं, बल्कि भीतर तक उतरती हुई अनुभूति बन जाए, तब संवेदनाएँ भी नए अर्थ पाने लगती हैं. यह कविता प्रेम की उसी कोमल और आत्मीय अनुभूति को शब्द देती है.
संध्या यादव, मुंबई सुनो जान… लोग कहते हैं, थके शरीर को नींद पत्थर पर भी आ जाती है और ऐसी ही गाढ़ी कमाई वाली नींद को मिलते हैं सपने… लोग ये भी कहते हैं कि सुबह के सपने सच होते हैं। मुझे नींद तो नहीं आई, मगर अक्सर झपकी लगी। ट्रेन में हैंडल पकड़े, एक…