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एक शरारत हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई | मित्र गिरधारी अरोरा को श्रद्धांजलि

एक शरारत हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई

कभी क्रिकेट के मैदान में अपनी स्पिन गेंदों से दोस्तों को छेड़ने वाला, तो कभी अपनी हँसी और शरारतों से हर महफ़िल को जीवंत बना देने वाला गिरधारी अरोरा अब सिर्फ़ यादों में बस गया है। कॉलेज के दिनों की दोस्ती, जनता एक्सप्रेस के सफ़र, महिदपुर रोड की गलियाँ और अनगिनत शरारतें आज भी दिल में ज़िंदा हैं। यह संस्मरण एक ऐसे दोस्त को श्रद्धांजलि है, जिसके जाने से यादों का एक पूरा दौर हमेशा के लिए ख़ामोश हो गया।

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स्टेशन पर विदा होते राघव और रिद्धिमा, आँखों में प्रेम और बिछड़ने की नमी

वो तीन दिन

तीन दिन, एक शहर और उम्र भर की यादें” राघव और रिद्धिमा की ऐसी भावनात्मक प्रेम कहानी है, जिसमें एक छोटी-सी मुलाकात जीवनभर की स्मृतियों में बदल जाती है। अदरक वाली चाय, मेहंदी में छिपा नाम, छत पर बिताई तारों भरी रात और स्टेशन पर बिछड़ने का दर्द ये छोटे-छोटे पल उनके रिश्ते की सबसे बड़ी पूंजी बन जाते हैं। यह कहानी बताती है कि सच्चे रिश्तों में दूरी मायने नहीं रखती, क्योंकि कुछ मुलाकातें समय से नहीं, दिल से जुड़ी होती हैं।

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फ्रेंडशिप डे पर दो दिवंगत मित्रों की याद में भावनात्मक लेख, सच्ची दोस्ती और यादों को समर्पित चित्र।

कुछ दोस्त जाते नहीं… बस दिखाई देना छोड़ देते हैं

कुछ दोस्त जीवन से कभी नहीं जाते, वे सिर्फ आँखों से ओझल हो जाते हैं। फ्रेंडशिप डे पर दो दिवंगत मित्रों पारस बोथरा और डॉ. रामगोपाल गुप्ता को समर्पित यह संस्मरण सच्ची दोस्ती, अपनापन और उन यादों की कहानी है जो समय के साथ और गहरी होती जाती हैं। यह लेख हर उस पाठक को अपने किसी बिछड़े दोस्त की याद दिलाएगा।

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फ्रेंडशिप डे पर स्वर्गीय फकीरचंद कसेरा को समर्पित भावुक संस्मरण. सच्ची मित्रता, अपनापन, यादें और जीवनभर साथ रहने वाले रिश्ते की मार्मिक कहानी.

दोस्त, तुम आज भी यादों में ज़िंदा हो…

फ्रेंडशिप डे के अवसर पर स्वर्गीय फकीरचंद कसेरा को समर्पित यह भावपूर्ण संस्मरण सच्ची मित्रता, विश्वास, अपनापन और जीवनभर साथ रहने वाली यादों का मार्मिक चित्रण है. सामाजिक जीवन में उनके योगदान, सरल व्यक्तित्व और मित्रता के अनमोल रिश्ते को शब्दों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गई है.

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नीम के पेड़ से झाँकता हुआ चाँद

नीम के पेड़ से झाँकता हुआ चाँद

नीम के पेड़ से झाँकता हुआ चाँद सिर्फ़ आसमान का चाँद नहीं, बल्कि समय का मौन साक्षी है। जून की तपती रात में चारपाई पर लेटी एक स्त्री अपनी स्मृतियों, रिश्तों और बदलती पीढ़ियों की यात्रा को चाँद से साझा करती है। यह रचना जीवन के बदलते पड़ावों की मार्मिक अनुभूति कराती है।

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मोहब्बत में बिछड़न और तन्हाई का दर्द व्यक्त करती हिंदी कविता 'मोहब्बतें'

मोहब्बतें

“मोहब्बतें” प्रेम की उन अनकही भावनाओं की कविता है, जहाँ इबादत, आदत, तन्हाई और बिछड़न एक-दूसरे में घुल जाते हैं। यह रचना अधूरे रिश्तों की टीस, यादों की क़यामत और दिल में दबी शिकायतों को बेहद संवेदनशील और मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त करती है।

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अलमारी में टंगे रंग-बिरंगे लेहंगे को देखती एक भारतीय महिला, शादी और पारिवारिक यादों में खोई हुई, भावनात्मक और यथार्थवादी दृश्य।

रिश्ते

खुश्बू गोयल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) वो लेहंगा, जो भैया की शादी में लिया था,उसकी भी बड़ी अजीब कहानी है। जब भी अलमारी खोलूँ,माँ को बस वही नज़र आता है,और हर बार की तरहउनका कहना शुरू हो जाता है “इतना भारी लेहंगा क्यों लिया था,जब तुझे पहनना ही नहीं था?” बस एक बार भैया की शादी…

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यादें

यह भावपूर्ण हिंदी कविता बिछड़ने के बाद भी जीवन के हर कोने में जीवित रहने वाली यादों की कहानी कहती है। प्रेम, स्मृतियों और विरह की संवेदनशील अभिव्यक्ति।

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तेरे होने और मेरे न होने के बीच | एक प्रेम कविता

तेरे होने, मेरे न होने के बीच

कुछ रिश्ते नाम से नहीं, एहसासों से जिए जाते हैं। यह कविता प्रेम, स्मृतियों, आगोश और उस अनकहे खालीपन की कहानी है, जहाँ “तेरे अलावा” और “तेरे बिना” एक साथ सांस लेते हैं।

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पुराने प्रेम पत्र और भावनात्मक यादों को दर्शाती ‘तेरे खत’ हिंदी कविता की यथार्थवादी छवि।

तेरे खत

“तेरे खत” प्रेम और विरह की उन अनमोल स्मृतियों को शब्द देती है, जब चिट्ठियाँ केवल संदेश नहीं बल्कि दिलों को जोड़ने वाला एहसास हुआ करती थीं। यह कविता पुराने खतों में सहेजे प्रेम, प्रतीक्षा और भावनात्मक जुड़ाव की मधुर यादों को जीवंत करती है।

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