
खुशबू गोयल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
घड़ी,
जो दिखने में साधारण,
पर दिल के बहुत करीब थी।
बहुत मोह था मुझे उससे,
पापा ने बड़े प्यार से
मेरी शादी में जो दी थी।
उस घड़ी से एक अलग-सा
लगाव हो गया था मुझे,
जैसे उसमें बसी हों
दुआएँ और स्नेह।
जब भी मैं घर से बाहर जाती,
उसे अपनी कलाई पर बाँध लेती,
वह मुझे हर पल
समय की सीमा में रहना सिखाती।
मेरे हर सुख-दुख के पलों में
उसने साथ निभाया था,
मैंने 16 साल तक
उसे संभालकर रखा था।
पर एक दिन
वह मुझसे खो गई,
न जाने कैसे
उस दिन मैं लापरवाह बन गई।
आज भी हर पल
दिल को
उसके खोने का अफसोस रहता है…
वह घड़ी भले ही खो गई,
पर उसकी यादें अब भी
मेरे दिल में बसी हैं।
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अत्यंत सुंदर कविता 💐..
अप्रतिम रचना के लिए आकाश भर बधाई 💕🌹
बेहतरीन रचना 👌👌👌