“छटती धुंध”

मुस्कुराती बुज़ुर्ग माँ अपने बेटे-बहू के साथ घर के आँगन में खड़ी, परिवार के अपनापन और सुरक्षा का भावनात्मक दृश्य। मुस्कुराती बुज़ुर्ग माँ अपने बेटे-बहू के साथ घर के आँगन में

इरा जौहरी लखनऊ

इधर बुजुर्गों के साथ अत्याचार जैसी खबरें समाचारों की सुर्ख़ियाँ बनकर मन में भविष्य की चिंता जगातीं और नित नई घबराहट पैदा करती रहती थीं।
तभी खुले दरवाज़े से ताज़ी हवा के झोंके-सी बेटे-बहू के आने की आहट के साथ उनकी बातचीत सुनाई दी।अब अम्मा को घर में कभी अकेले नहीं रहने देंगे। उन्हें अपने साथ ले चलेंगे। वहाँ उन्हें कभी अकेलापन नहीं खलेगा और हमें भी घर में किसी बुज़ुर्ग की छत्रछाया मिल सकेगी।”
सब सुनकर, जहाँ पहले हर पल भविष्य की राहें धुंधली नज़र आती थीं, अब उन राहों की धुंध छँटने लगी थी।

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