मुस्कुराती बुज़ुर्ग माँ अपने बेटे-बहू के साथ घर के आँगन में खड़ी, परिवार के अपनापन और सुरक्षा का भावनात्मक दृश्य।

“छटती धुंध”

समाचारों में बुज़ुर्गों के साथ बढ़ते अत्याचार की खबरें मन में भय और भविष्य की चिंता भर देती हैं। लेकिन एक दिन बेटे-बहू का लिया गया छोटा-सा निर्णय एक माँ के जीवन की सारी धुंध छाँट देता है। पढ़िए “छटती धुंध”, परिवार, अपनत्व और बुज़ुर्गों के सम्मान का मार्मिक संदेश देती एक भावनात्मक लघुकथा।

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मायके के दरवाज़े पर खड़ी एक भावुक बेटी, माँ की तस्वीर को देखते हुए बीते दिनों को याद करती हुई।

पराया मायका

माँ के रहते मायका सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि प्यार, अपनापन और प्रतीक्षा का दूसरा नाम होता है। लेकिन माँ के जाने के बाद वही घर क्यों पराया-सा लगने लगता है? ‘पराया मायका’ एक ऐसी भावुक लघुकथा है, जो हर बेटी के दिल में छिपे उस खालीपन को शब्द देती है, जिसे केवल माँ की अनुपस्थिति ही पैदा कर सकती है।

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डेस्क पर बैठकर लेखन करती हुई भारतीय शिक्षिका और कवयित्री, सामने डायरी और पुस्तकें, साहित्यिक वातावरण में प्रेरणादायक व्यक्तित्व का चित्र।

दहलीज से साहित्य शिखर तक

माता-पिता के संस्कार, परिवार के सहयोग और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाने वाली शिक्षिका एवं कवयित्री की प्रेरक जीवन यात्रा। जानिए उनके लेखन, छंद साधना, संस्मरण प्रेम और सफलता के पीछे की कहानी।

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शब्दों की विहांगी : नीलम पेड़ीवाल

नीलम पेड़ीवाल “विहांगी” हिंदी साहित्य की एक सक्रिय और बहुआयामी रचनाकार हैं। इस विशेष साक्षात्कार में उन्होंने अपने साहित्यिक सफर, लेखन प्रेरणा, संघर्ष, उपलब्धियों और नए रचनाकारों के लिए महत्वपूर्ण संदेश साझा किए हैं।

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चोर को पकड़ने के बाद भी भूख के डर से जूझता एक गरीब मजदूर शंभू

डर

चोर को पकड़ने वाला साहसी शंभू किसी इंसान से नहीं डरता, लेकिन जब पत्नी उससे उसके सबसे बड़े डर के बारे में पूछती है, तो उसका उत्तर समाज की सबसे कड़वी सच्चाई उजागर कर देता है—भूख।

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भीड़भाड़ वाले भारतीय शहर के बाज़ार में ट्रैफिक जाम के बीच खड़ी एक महिला मुस्कुराते हुए अपने आसपास की चहल-पहल को देख रही है। सड़क पर वाहन, दुकानदार, राहगीर और बाजार की हलचल दिखाई दे रही है, जो अपने शहर के प्रति अपनापन, जीवंतता और जीवन के उत्साह को दर्शाती है।

खोया हुआ शहर

विदेश की सुव्यवस्थित और मशीनी जिंदगी छोड़कर अपने शहर की भीड़, जाम, बिजली कटौती और जीवंत हलचल में लौटने वाली एक महिला की कहानी। यह कथा बताती है कि जीवन केवल सुविधाओं का नाम नहीं, बल्कि उन धड़कनों का भी नाम है जो हमें अपनेपन का एहसास कराती हैं।

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बिल्कुल तुम्हारी तरह

पति-पत्नी के रिश्ते में तुलना, अपनापन और प्रेम की हल्की नोकझोंक को बयां करती यह भावनात्मक हिंदी लघुकथा बताती है कि हर रिश्ता अपनी अलग पहचान चाहता है।

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A poor woman in a faded saree stands near a luxurious modern apartment building

दीवार के उस पार..

एक मासूम बच्चा सिर्फ एक सुंदर बिल्डिंग को छूना चाहता था, लेकिन समाज ने उसे “चोर” कहकर थप्पड़ दे दिया। यह कहानी गरीबी, स्वाभिमान और सपनों के बीच खड़ी अदृश्य दीवारों की मार्मिक सच्चाई को उजागर करती है।

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एक युवती पुराने पोस्टकार्ड को हाथ में लेकर भावुक होती हुई, अपने पहले प्यार और यादों में खोई हुई।

पहला प्यार

एक साधारण-सा पोस्टकार्ड, जो जीवन के पहले प्यार की सबसे अनमोल निशानी बन जाता है। यह लघुकथा यादों और भावनाओं के उस कोमल संसार में ले जाती है, जहाँ पहला प्रेम कभी भुलाया नहीं जा सकता।

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तिलमिलाहट: जब संस्कारों की आड़ में छिपा सच सामने आया

तिलमिलाहट

जब एक परिवार में संस्कारों की दुहाई दी जाती है, तभी एक ऐसा सच सामने आता है जो उन सभी मूल्यों को झकझोर देता है। “तिलमिलाहट” एक ऐसी कहानी है जो समाज के दोहरे चेहरे को बेनकाब करती है।

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