
डॉ. ऋषिका वर्मा, गढ़वाल (उत्तराखंड)
एक लड़की की जब शादी होती है, तो उसे कई नए रिश्ते और एक नया घर मिलता है। नया घर यानी ससुराल, जहाँ सब कुछ उसके लिए नया होता है। सास-ससुर, ननद-देवर, यहाँ तक कि पति भी उसके लिए एक अनजान व्यक्ति ही होता है। वही पति, जिसके भरोसे वह शादी करके नए घर में आती है और सभी नए रिश्तों को अपनाने की कोशिश करती है।
नया घर, नया परिवेश—उसके लिए तो सब कुछ नया होता है। नए माहौल और नए लोगों से तालमेल बैठाने में समय लगना स्वाभाविक है। कहीं-कहीं तो शादी के बाद पति अपनी पत्नी को परिवार वालों के भरोसे छोड़कर काम या अन्य कारणों से दूर चला जाता है और यह आश्वासन देता है कि बीच-बीच में मिलने आता रहेगा।
पत्नी पूरी कोशिश करती है कि वह इस नए परिवेश में खुद को ढाल सके। लेकिन मेरा इस समाज और खासकर ससुराल पक्ष के लोगों से सवाल है क्यों एक लड़की, जो अभी-अभी आपके परिवार की नई सदस्य बनी है, उससे यह उम्मीद की जाती है कि आते ही वह पूरे परिवार की जिम्मेदारियाँ संभाल ले और हर काम पूरी तरह निभाए?
उससे खाना बनवाना, झाड़ू-पोछा करवाना और घर के कई अन्य काम करवाने के बाद भी शिकायतें कम नहीं होतीं। वह नई लड़की नए परिवेश में सब काम कर भी ले, तब भी कई बार ससुराल पक्ष का मन संतुष्ट नहीं होता। उन्हें लड़की सुंदर और संस्कारी तो चाहिए, लेकिन साथ ही वे उसे घर के काम करने वाली एक ‘नौकरी’ समझ बैठते हैं।
कुछ लोग तो इंसानियत तक भूल जाते हैं कि बहू भी इंसान होती है। उसकी भी भावनाएँ होती हैं, उसे भी भूख लगती है, वह भी बीमार पड़ती है। यह कैसा समाज है और ये कैसे लोग हैं?
खुद की बेटी पर बीतती है तो दर्द महसूस होता है, और दूसरों की बेटी पर बीते तो वह नाटक लगने लगता है। एक बहू बहुत कोशिश करती है कि सब कुछ सही रहे। कितने ताने और कितनी प्रताड़नाओं के बाद भी वह चुप रहती है और अपनी शादी बचाने की कोशिश करती है। लेकिन एकतरफा कोशिश कभी सफल नहीं होती।
अंत में वह या तो टूट जाती है या फिर पहले से अधिक मजबूत हो जाती है। जब उसके सामने कोई रास्ता नहीं बचता, तब वह कठोर कदम उठाने को मजबूर हो जाती है।
सवाल यह है क्या एक बहू को, एक अकेली स्त्री को अपनाना इतना मुश्किल है? क्या उसे भी परिवार के बाकी सदस्यों की तरह प्यार, सम्मान और देखभाल पाने का अधिकार नहीं है?
किसी इंसान को इतना भी मजबूर नहीं करना चाहिए कि उसके भीतर जीवन जीने की इच्छा ही खत्म हो जाए।

सहमति
यथार्थ
आपके विचारों से सहमत हूँ मैं 🙏
बहुत-बहुत सही कहा आपने… यथार्थ लेखन
लेखिका के कथ्य से पूर्णतया सहमत
यथार्थवादी रचना 👌👌👏👏