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पालना महान है !

एक बच्चे को स्नेहपूर्वक गोद में लिए अभिभावक, जो जन्म से अधिक पालन-पोषण के महत्व को दर्शाता है। पालना महान है

डाॅ.नीरजा श्रीवास्तव ‘नीरू’

माना कि अर्ज़ी भी जानकर दी,
जाना भी कि ख़ुदगर्ज़ी अपनी थी।
नश्वर देह दिया, वह भी तो मर्ज़ी थी,
फिर पुण्य कहाँ? बात ही फ़र्ज़ी थी।

जन्म देना प्रकृति का नियम ही था,
जन्म देने का दर्द भी प्राकृतिक था।
कैसे कहें, किया हमने सब पर उपकार बड़ा?
विज्ञान-युग का प्रश्नचिह्न अब आन खड़ा।

पुण्य जन्म देना है या किसी को पालना सही?
कमी क्यों पालने में, यदि केवल हाथ वही?

जन्म मिले तो सुख संग दु:ख भी हैं मिलते,
अधिभौतिक-आत्मिक-दैविक, तो क्यूँ देते?

अपने स्वार्थ-सुखों की ख़ातिर है सब,
जन्म देना क्यों महान बताते हैं?

दुःख देने का अधिकार किसे है, कैसे?
फिर क्यों सब एहसान जताते हैं?

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