एक बच्चे को स्नेहपूर्वक गोद में लिए अभिभावक, जो जन्म से अधिक पालन-पोषण के महत्व को दर्शाता है।

पालना महान है !

क्या किसी बच्चे को जन्म देना ही सबसे बड़ा पुण्य है, या उसका प्रेम, त्याग और जिम्मेदारी के साथ पालन-पोषण करना अधिक महान है? “पालना महान है!” कविता इसी प्रश्न को केंद्र में रखकर समाज की स्थापित धारणाओं को चुनौती देती है। यह रचना मातृत्व-पितृत्व, स्वार्थ, कर्तव्य और जीवन के दार्शनिक पक्ष पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करती है। संवेदनशील भाषा और तीखे प्रश्नों के माध्यम से कविता पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।

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वृद्धाश्रम में खिड़की के पास बैठी एक बुजुर्ग भारतीय माँ, हाथ में बेटे की फोटो, आंखों में इंतज़ार और दर्द

मस्‍त हवा का इक झौंका

यह कविता मां और बच्चों के प्रेम और यादों की भावनाओं को उजागर करती है। जीवन में अलगाव, पालन-पोषण और अंततः मातृत्व के अद्भुत बंधन को दर्शाती यह कविता भावनात्मक और मार्मिक है। प्रत्येक पंक्ति में माँ और बच्चे के बीच के गहरे प्यार और यादों का सौंदर्य दिखाई देता है।

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