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रात में अपनी सोती हुई बेटी को देखते हुए चिंतन में डूबी महिला आईपीएस अधिकारी

ज़िम्मेदारियां अपनी-अपनी

एक सफल आईपीएस अधिकारी की ज़िंदगी का वह मोड़, जहाँ कर्तव्य, मातृत्व, परिवार और भविष्य की चिंता आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। यह संवेदनशील कहानी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और माता-पिता के कठिन निर्णयों पर गहरा प्रश्न उठाती है।

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मेघालय की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच परिवार के साथ यात्रा का सुंदर दृश्य

भागती रेल, हँसता परिवार और मेघालय की यादें

कोलकाता से ट्रेन, गुवाहाटी से बस और फिर मेघालय की मनमोहक वादियों तक पहुँची यह पारिवारिक यात्रा केवल एक शादी में शामिल होने का सफ़र नहीं, बल्कि हँसी, अपनापन, रोमांच और प्रकृति की सुंदरता से भरा अविस्मरणीय संस्मरण है।

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दहेज के बोझ से चिंतित बेटी और माता-पिता का भावुक दृश्य

दहेज प्रथा: विवाह संस्कार या सामाजिक व्यापार ?

दहेज प्रथा पर आधारित यह विचारोत्तेजक लेख विवाह जैसे पवित्र संस्कार के बदलते स्वरूप, सामाजिक मानसिकता, आर्थिक दबाव, स्त्रीधन के अधिकार और आधुनिक समाज की वास्तविकताओं पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करता है। यह लेख पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।

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एक भूखा बच्चा रोटी की ओर उम्मीद भरी नज़रों से देखता हुआ

भूख

यह मार्मिक कविता भूख, ग़रीबी और सामाजिक विषमता की उस कठोर सच्चाई को सामने लाती है, जहाँ एक ओर भोजन की बर्बादी है और दूसरी ओर एक निवाले के लिए तड़पते लाखों चेहरे। कविता मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का गहरा संदेश देती है।

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विरह में प्रियतम की प्रतीक्षा करती नायिका का भावपूर्ण चित्र

बिरहा की भोर 

प्रेम और विरह की गहन अनुभूति से सजी यह कविता चातक, स्वाति और मधुसूदन जैसे प्रतीकों के माध्यम से प्रतीक्षा, तड़प और आशा का अद्भुत चित्र प्रस्तुत करती है। हर पंक्ति पाठक को भावनाओं की गहराई तक ले जाती है।

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विरासत पत्रिका लोकार्पण

मुंबई में ‘विरासत’ पत्रिका और पुस्तक ‘शब्द पुंज’ का भव्य लोकार्पण

मुंबई के अंधेरी स्थित भवन्स कल्चरल सेंटर में आयोजित भव्य साहित्यिक समारोह में श्री बीरेंद्र शाह फाउंडेशन की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘विरासत’ के सातवें विशेषांक ‘रामायण की अवांतर कथाएँ’ तथा सुप्रसिद्ध लेखिका एवं प्रधान संपादक रागिनी बीरेंद्र शाह की नई पुस्तक ‘शब्द पुंज’ का लोकार्पण किया गया। देशभर से आए साहित्यकारों, विद्वानों और विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और भारतीय परंपरा पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए।

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बारिश की बूंदें: धरती और आकाश के प्रेम का अद्भुत काव्य

बारिश की बूंदें

बारिश की पहली बूंद जब सूखी धरती को छूती है, तो वह केवल मिट्टी को नहीं, बल्कि भावनाओं को भी जीवन देती है। यह कविता धरती और आकाश के उस अनंत प्रेम की कहानी है, जहाँ हर बूंद एक प्रेम-पत्र बनकर उतरती है और हर स्पर्श विरह को मिलन में बदल देता है। प्रकृति के मनोहारी रूपकों के माध्यम से प्रेम, वात्सल्य, प्रतीक्षा और आत्मिक एकाकार होने की अनुभूति को बेहद भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया गया है।

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दादर से पंढरपुर जाने वाली आषाढ़ी वारी 2026 विशेष ट्रेन में यात्रा करते श्रद्धालु

आषाढ़ी वारी 2026 : पंढरपुर के लिए दादर से 2 विशेष ट्रेनें

आषाढ़ी वारी 2026 के लिए मध्य रेल ने श्रद्धालुओं को बड़ी सौगात दी है. दादर-पंढरपुर-दादर के बीच 24 और 26 जुलाई को दो विशेष ट्रेनें चलेंगी. जानें समय, स्टॉपेज, आरक्षण और टिकट बुकिंग की पूरी जानकारी.

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कमर के लव हैंडल्स कम करने के लिए बाइसिकल क्रंचेस, रशियन ट्विस्ट और साइड प्लैंक करती फिटनेस ट्रेनर.

जींस पहनते ही दिखते हैं लव हैंडल्स ?

कमर के दोनों तरफ जमी जिद्दी चर्बी यानी लव हैंडल्स से परेशान हैं? रोज सिर्फ 15 मिनट इन 5 आसान एक्सरसाइज को अपनाकर साइड फैट कम करें, कमर को दें बेहतर शेप और बढ़ाएं फिटनेस.

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रिश्तों में धोखे और तन्हाई की भावना को दर्शाती एक भावनात्मक हिंदी-उर्दू ग़ज़ल की प्रतीकात्मक तस्वीर

आज़माए को आज़माते हो

“यार, धोखे पे धोखा खाते हो” एक मार्मिक हिंदी-उर्दू ग़ज़ल है, जो रिश्तों में मिले धोखे, अधूरी उम्मीदों और दिल की पीड़ा को बेहद संवेदनशील अंदाज़ में व्यक्त करती है। हर शेर इंसानी रिश्तों की बदलती सच्चाइयों, तन्हाई और बेवफाई के दर्द को उकेरता है। सरल लेकिन असरदार भाषा में लिखी गई यह ग़ज़ल पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है और लंबे समय तक मन में अपनी छाप छोड़ती है।

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