कविता
तुम चुप रहो
“तुम चुप रहो” एक तीखी और प्रभावशाली हिंदी कविता है, जो समाज में दबाई गई आवाज़ों, विशेषकर महिलाओं की घुटन और संघर्ष को दर्शाती है। यह रचना सवाल उठाती है क्या चुप रहना ही समाधान है या अन्याय के खिलाफ बोलना जरूरी है?
खामोशी बोलती है
खामोशी एक ऐसी भाषा है जो बिना शब्दों के भी दिल की हर भावना को बयां कर देती है। यह कविता जीवन के हर पड़ाव को मौन के माध्यम से व्यक्त करती है।
“जाग जाओ तो राम हो”
यह कविता व्यक्ति के भीतर छिपे रामत्व को जागृत करने की प्रेरणा देती है। कवि ने राम, रावण, कुंभकर्ण, जटायु और गिलहरी जैसे प्रतीकों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया है कि हर इंसान में अच्छाई और बुराई दोनों होती हैं। यदि हम अपने विवेक और संस्कारों को जगाएं, तो हम भी अपने जीवन में राम के आदर्शों को प्राप्त कर सकते हैं।
सूर्य वंदना
यह कविता प्रातःकालीन सूर्य की किरणों के माध्यम से प्रकृति के नवजीवन, ऊर्जा और जागृति का अत्यंत सुंदर चित्रण करती है। कवि ने मरीचि (सूर्य किरण) को समर्पित भावों के जरिए यह दर्शाया है कि किस प्रकार हर सुबह नई आशा, नई चेतना और सकारात्मकता लेकर आती है।
शब्दों का जादू
यह कविता शब्दों और भावनाओं की उस दुनिया को दर्शाती है, जहाँ कविता हँसी, आँसू, सच और सपनों का सुंदर संगम बन जाती है। यह रचना बताती है कि कविता सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। हर पंक्ति में छुपा एहसास जीवन को रंगीन बना देता है।
निर्बल की तुम ढाल बनना
निर्बल की तुम ढाल बनना एक प्रेरणादायक हिंदी कविता है जो मानवता, करुणा और सहानुभूति का संदेश देती है। यह रचना हमें सिखाती है कि जो कमजोर हैं, उन्हें सहारा देना और उनके आँसू पोंछना ही सच्ची इंसानियत है।
साध्वी शाश्वतप्रिया म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश
महिदपुर रोड में साध्वी श्री शाश्वतप्रिया जी म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश। गुरुदेव जयघोष, धर्मसभा और रतलाम चातुर्मास निमंत्रण।
एहसासों का लावा…
लेखक केवल शब्द नहीं लिखता, वह अपने भीतर उमड़ते भावों को स्याही में घोलकर काग़ज़ पर उतारता है। कलम उसकी भावनाओं का वाहक बनती है और कोरा काग़ज़ अहसासों का सजीव संसार। यही लेखन श्रोताओं के दिल तक पहुँचकर अपनी अमिट छाप छोड़ देता है।
