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कवि मंदिर के शांत वातावरण में भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन, पृष्ठभूमि में बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण का दिव्य दृश्य

समर्पण: आत्मा से परमात्मा तक

यह कविता आत्मा के परमात्मा में पूर्ण समर्पण की भावभूमि को अत्यंत सरल और मार्मिक शब्दों में व्यक्त करती है। इसमें भक्त और भगवान के बीच के उस गहरे, व्यक्तिगत संबंध को उकेरा गया है, जो किसी बाहरी आडंबर का मोहताज नहीं होता। कवि के लिए श्रीकृष्ण केवल आराध्य नहीं, बल्कि जीवन के हर भाव, हर संघर्ष और हर सत्य के आधार बन जाते हैं। श्रद्धा, वैराग्य और निष्काम भक्ति के माध्यम से यह रचना बताती है कि सच्चा समर्पण ही आत्मिक शांति और वास्तविक अस्तित्व का मार्ग है।

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खुली किताब से निकलती रोशनी और भावनाओं का संसार, साहित्य की शक्ति को दर्शाता दृश्य

किताबों की खुशबू

किताबों की खुशबू में एक ऐसा संसार बसता है, जहाँ शब्द नहीं, भावनाएँ बोलती हैं। साहित्य केवल अक्षरों का मेल नहीं, बल्कि आत्मा की आवाज़ है, जो हर युग में मन को छूती है। यह कभी भक्ति, कभी सत्य, तो कभी प्रेम और जीवन की गहराई बनकर हमारे भीतर उतरता है। अंधेरों में यही एक दीप बनकर राह दिखाता है और उलझनों में उत्तर बनकर सामने आता है। इसलिए किताबों से जुड़ना, दरअसल खुद से जुड़ना है क्योंकि साहित्य ही हमें इंसान बनने का सच्चा अर्थ सिखाता है।

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पतझर में गिरते पत्तों के बीच अकेला रास्ता, दूरी और शांति का प्रतीक दृश्य

दूरी…

यह कविता दूरियों के महत्व और उनके भीतर छिपी गरिमा को उजागर करती है। समय, स्थान और निर्वात के माध्यम से जीवन के गहरे सत्य को बेहद सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

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खामोश बैठी महिला, समाज की बंदिशों और अंदरूनी घुटन को दर्शाती हुई

तुम चुप रहो

“तुम चुप रहो” एक तीखी और प्रभावशाली हिंदी कविता है, जो समाज में दबाई गई आवाज़ों, विशेषकर महिलाओं की घुटन और संघर्ष को दर्शाती है। यह रचना सवाल उठाती है क्या चुप रहना ही समाधान है या अन्याय के खिलाफ बोलना जरूरी है?

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सूर्योदय के समय खड़ा एक व्यक्ति, जिसके पीछे राम का प्रतीकात्मक प्रकाश आभामंडल, आंतरिक जागृति और आध्यात्मिक ऊर्जा को दर्शाता हुआ दृश्य

“जाग जाओ तो राम हो”

यह कविता व्यक्ति के भीतर छिपे रामत्व को जागृत करने की प्रेरणा देती है। कवि ने राम, रावण, कुंभकर्ण, जटायु और गिलहरी जैसे प्रतीकों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया है कि हर इंसान में अच्छाई और बुराई दोनों होती हैं। यदि हम अपने विवेक और संस्कारों को जगाएं, तो हम भी अपने जीवन में राम के आदर्शों को प्राप्त कर सकते हैं।

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सूर्योदय का शांत और ऊर्जा से भरा प्राकृतिक दृश्य

सूर्य वंदना

यह कविता प्रातःकालीन सूर्य की किरणों के माध्यम से प्रकृति के नवजीवन, ऊर्जा और जागृति का अत्यंत सुंदर चित्रण करती है। कवि ने मरीचि (सूर्य किरण) को समर्पित भावों के जरिए यह दर्शाया है कि किस प्रकार हर सुबह नई आशा, नई चेतना और सकारात्मकता लेकर आती है।

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खिड़की के पास बैठा व्यक्ति डायरी में कविता लिखते हुए, आसपास शांत वातावरण और रचनात्मक माहौल

शब्दों का जादू

यह कविता शब्दों और भावनाओं की उस दुनिया को दर्शाती है, जहाँ कविता हँसी, आँसू, सच और सपनों का सुंदर संगम बन जाती है। यह रचना बताती है कि कविता सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। हर पंक्ति में छुपा एहसास जीवन को रंगीन बना देता है।

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