सूर्य वंदना

सूर्योदय का शांत और ऊर्जा से भरा प्राकृतिक दृश्य “हर सुबह सिर्फ उजाला नहीं लाती… वह जीवन में नई चेतना भरती है

प्रातः-प्रभाती समर्पित है मरीचि को,
प्राण-पुलकित भरती रश्मि प्रचीति को।

रज-रज, कण-कण को देती नव श्वास,
वसुधा को पुनर्जीवित करती प्रतीति को।

नव-पल्लव, कली-कुसुम में भरे सौरभ,
ऊष्मा भरी किरणें रूप देती प्रकृति को।

खग-विहग का किलोल, जैसे गूँजी सरगम,
वंदन-स्पंदन आनंद कराती अनुभूति को।

नित्य-क्रम तुम निभाते, दिनकर! निष्ठा से,
भाव-समर्पण हमारा इस कर्तव्य-जागृति को।
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