
माधवी उपाध्याय, प्रसिद्ध लेखिका, जमशेदपुर (झारखंड)
पल-पल जीवन,
कल-कल जीवन,
बहता, घटता
हर पल जीवन।।
झर-झर जीवन,
सर-सर जीवन,
उठते-गिरते
चलता जीवन।।
विहँस रहा नित,
विवश रहा नित,
घटता रहता
अविकल जीवन।।
श्वास नई नित,
आस नई नित,
मन अनुरागी
पलाश जीवन।।
नव-नव कोंपल,
मह-मह यों पल,
मादक महुआ
सजता जीवन।।
पात-पात झड़,
नवल हास गढ़,
आम टिकोरे
महका जीवन।।
कठिन समय में,
जटिल समय में,
संभल-संभल
बढ़ता जीवन।।

बहुत अच्छी कविता👍👌💐