पल-पल जीवन

प्रकृति के बीच बहती नदी, पलाश के फूल और जीवन के प्रवाह को दर्शाता शांत दृश्य जीवन के हर पल में बहता संघर्ष और नई आशा का संदेश

माधवी उपाध्याय, प्रसिद्ध लेखिका, जमशेदपुर (झारखंड)

पल-पल जीवन,
कल-कल जीवन,
बहता, घटता
हर पल जीवन।।

  झर-झर जीवन,
  सर-सर जीवन,
  उठते-गिरते
  चलता जीवन।।

विहँस रहा नित,
विवश रहा नित,
घटता रहता
अविकल जीवन।।

  श्वास नई नित,
  आस नई नित,
  मन अनुरागी
  पलाश जीवन।।

नव-नव कोंपल,
मह-मह यों पल,
मादक महुआ
सजता जीवन।।

  पात-पात झड़,
  नवल हास गढ़,
  आम टिकोरे
  महका जीवन।।

कठिन समय में,
जटिल समय में,
संभल-संभल
बढ़ता जीवन।।

9 thoughts on “पल-पल जीवन

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