गुरु का स्पर्श, सफलता का मार्ग

कक्षा में छात्रों को पढ़ाते हुए शिक्षक, ज्ञान और प्रेरणा का वातावरण शिक्षक ही वो शिल्पकार है, जो कच्ची माटी को उज्ज्वल भविष्य में ढालता है

अंजू सुंदर,असिस्टेंट प्रोफेसर, लखनऊ

कच्ची माटी को आकार देती हूँ,
रुको न तुम तुम्हें रफ़्तार देती हूँ।
मैं शिक्षक हूँ, सृजन ही काम है मेरा,
विचारों को तुम्हारे मैं नई धार देती हूँ।

जनम देते माता-पिता तुमको,
चरित्र को मैं ही आधार देती हूँ।
तुम सींचोगे भारत की बगिया को,
मैं मूल्यों का तुमको उपहार देती हूँ।

बढ़ते तुम प्रगति-पथ पर तो,
मैं निर्देशों से तुम्हें हुंकार देती हूँ।
सफल तुम हो तो जय मेरी भी होती है,
मैं अपने प्रयासों से तुम्हें निखार देती हूँ।
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