सरस्वती वंदना

वीणा धारण किए श्वेत कमल पर विराजमान माँ सरस्वती का दिव्य और शांत स्वरूप।

अंशु गुप्ता, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

हे स्वामिनी, ज्ञानदायिनी,
भक्ति-प्रकाश उर में भर दे।
हे स्वामिनी, वर दे॥

कंठ में बस उल्लास तू कर दे,
मीठे शब्दों से लसित मुख कर दे,
सहज, संयम, संतुलन का वर दे॥

हे जग-स्वामिनी,
वीणा-धारिणी,
मति में बस अक्षरों से नृत्य तू कर दे॥

हे भगवती, सत्य की सत्त्वती,
माँ सरस्वती, स्नेह तू कर दे,
तारों पर तर्जनी से वार तू कर दे॥

हे स्वामिनी, प्राण-प्राणेश्वरी,
मुझ पर कृपा माँ तू कर दे,
जीभा पर बसे नाम तेरा,
ऐसा स्वाद तू कर दे॥

हे स्वामिनी, जग-तारिणी,
शुद्ध लेखनी का तू वर दे॥

हे स्वामिनी,
उर-मुख पर रहे स्मरण तेरा,
ऐसी कृपा तू कर दे॥

हे स्वामिनी, ज्ञानदायिनी,
भक्ति-प्रकाश उर में भर दे॥

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