भावनात्मक कविता
लक्ष्य जीवन का
यह कविता जीवन के दर्द, संघर्ष, कर्म और उम्मीद की भावनात्मक यात्रा को शब्द देती है। संवेदनाओं, हौसलों और आत्मिक प्रकाश से भरी यह रचना जीवन-दर्शन की गहरी अनुभूति कराती है।
सच्ची लगन
अर्चना ज्ञानी, उज्जैन कर्मनिष्ठा और निरंतर प्रयास सेउच्च शिखर पर बढ़ती रहो। अपनी लक्ष्मण-रेखास्वयं खींचकर,मान-सम्मान की गरिमामयीघृत-दीपज्योति बनो। पवित्र आँगन की श्याम तुलसी,चौरे की राम तुलसी जैसी मर्यादित,सागर-सी गंभीरता,आकाश-सी विशालता लिए,नभ में अरुंधति-सी चमकती रहो। मेरे आँगन में हल्दी-कुंकू की रंगोली-सीसदा तुम दमकती रहो।मेरे पावन संस्कारों में पली,चेहरे पर मर्यादा-मोहिनी सजाए,सदा तुम चहकती रहो। माँ…
किताब दिल में, लैपटॉप हाथ में
‘किताब दिल में, लैपटॉप हाथ में’ कविता किताबों की आत्मीयता, काग़ज़ की खुशबू और डिजिटल दौर की तेज़ रफ़्तार के बीच छुपे भावनात्मक संघर्ष को व्यक्त करती है। यह रचना बदलते समय को स्वीकारते हुए भी दिल में बसती किताबों की अमिट जगह को संवेदनशील शब्दों में उकेरती है।
गौरैया
खिड़की पर आकर चहकती गौरैया केवल एक पक्षी नहीं लगती, बल्कि जीवन की जिद और आशा का जीवंत रूप प्रतीत होती है। नन्ही चोंच में तिनके दबाए वह जैसे हर बार याद दिलाती है कि टूटे हुए घोंसले भी फिर से बसाए जा सकते हैं। उसकी चपल उड़ान और निरंतर प्रयास उस मन से संवाद करते हैं, जो उदासी और पीड़ा के बोझ तले थक चुका है। यह कविता गौरैया के माध्यम से जीवन, आशा और भीतर फिर से घर बनाने की इच्छा को संवेदनशीलता से अभिव्यक्त करती है।
हो जाओगे लापता
यह कविता प्रेम की पवित्रता, आत्मिक जुड़ाव और भावनाओं की गहराई को खूबसूरती से व्यक्त करती है। इसमें मुहब्बत को वासना से अलग एक रूहानी एहसास के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
संतुष्ट मुस्कान
अधूरी इच्छाओं और भागती जिंदगी के बीच सच्ची संतुष्टि कहाँ मिलती है? “संतुष्ट मुस्कान” कविता एक मासूम बालिका की मुस्कान में जीवन का गहरा दर्शन खोजती है।
