चुप्पी, अविश्वास और यौन उत्पीड़न पर आधारित मार्मिक हिंदी कहानी 'उलझन'

उलझन

‘उलझन’ एक संवेदनशील हिंदी कहानी है, जिसमें एक युवती अपने जीजा की गलत हरकतों का शिकार होती है। चुप्पी और गलतफ़हमी उसे अपराधी बना देती है। यह कहानी बताती है कि हर दिखाई देने वाला सच, वास्तव में सच नहीं होता और समय पर आवाज़ उठाना कितना आवश्यक है।

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राष्ट्रभक्ति और मानवता का संदेश देता हिंदी प्रणय गीत

प्रणय गीत

यह गीत प्रेम की अभिव्यक्ति से पहले राष्ट्र, मानवता और एकता को सर्वोच्च स्थान देता है। समाज में बढ़ती घृणा, विघटन और चुनौतियों के बीच यह रचना प्रेम से अधिक कर्तव्य, समर्पण और राष्ट्रीय चेतना का प्रभावशाली संदेश देती है।

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मोहब्बत में बिछड़न और तन्हाई का दर्द व्यक्त करती हिंदी कविता 'मोहब्बतें'

मोहब्बतें

“मोहब्बतें” प्रेम की उन अनकही भावनाओं की कविता है, जहाँ इबादत, आदत, तन्हाई और बिछड़न एक-दूसरे में घुल जाते हैं। यह रचना अधूरे रिश्तों की टीस, यादों की क़यामत और दिल में दबी शिकायतों को बेहद संवेदनशील और मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त करती है।

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सुबह की सुनहरी रोशनी में हाथ में चाय का प्याला लिए एक भारतीय महिला खिड़की के पास खड़ी है। बाहर ओस से भीगे फूल, दूर पहाड़ और बहता झरना दिखाई दे रहा है। वातावरण शांत, आत्मचिंतन और निःस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है।

निःस्वार्थ प्रेम

‘निःस्वार्थ प्रेम’ एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जो स्त्री के मौन, त्याग, धैर्य और प्रेम की गहराई को प्रकृति के सुंदर बिंबों के माध्यम से अभिव्यक्त करती है। यह कविता बताती है कि समय के साथ स्त्री शिकायतों से नहीं, बल्कि अनुभवों से परिपक्व होती है। वह जीवन की कड़वाहट को मुस्कान में बदलना जानती है, बंधनों को पीछे छोड़ देती है और प्रेम के उस रूप को संजोए रखती है, जिसमें अधिकार नहीं, केवल समर्पण होता है। कविता पाठक को प्रेम, आत्मबल और स्त्री के अंतर्मन की अनकही दुनिया से परिचित कराती है।

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एक भारतीय गली में खड़ा वफ़ादार देसी कुत्ता गुस्से से एक शराबी व्यक्ति की ओर भौंक रहा है, जबकि पास में एक वृद्ध महिला सुरक्षित खड़ी है। दृश्य साहस, सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है।

‘सबक’

‘सबक’ एक मार्मिक हिंदी लघुकथा है, जो यह बताती है कि संवेदना और कृतज्ञता केवल इंसानों की नहीं, पशुओं की भी पहचान होती है। गंगू चाची के स्नेह और सम्मान का ऋण चुकाने के लिए शेरू अन्याय का डटकर सामना करता है। यह कहानी केवल एक कुत्ते की वफ़ादारी नहीं, बल्कि महिला सम्मान, मानवीय संवेदनाओं और गलत के खिलाफ खड़े होने का सशक्त संदेश भी देती है। अंत में पाठक के मन में यही प्रश्न रह जाता है कि असली इंसानियत किसमें है इंसान में या उस बेजुबान में?

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एक भारतीय वृद्ध दम्पति पार्क की बेंच पर बैठे हैं। उनके सामने बेटा-बहू हाथ जोड़कर क्षमा माँग रहे हैं, जबकि आसपास समाज के लोग और अधिकारी खड़े हैं। वातावरण भावुक, आशावान और पारिवारिक मेल-मिलाप का प्रतीक है।

हर्ष के अंकुर

‘फिर हर्ष के अंकुर फूटने लगे’ एक मार्मिक सामाजिक कहानी है, जो बताती है कि माता-पिता का सम्मान केवल नैतिक कर्तव्य नहीं, बल्कि परिवार की सबसे बड़ी पूँजी है। उपेक्षा, अकेलेपन और पीड़ा से जूझ रहे एक बुजुर्ग दम्पति की कहानी तब नया मोड़ लेती है, जब समाज, प्रशासन और परिवार मिलकर रिश्तों को टूटने से बचाने का प्रयास करते हैं। पश्चाताप, क्षमा और सेवा के भाव से यह कहानी मानवीय संवेदनाओं को गहराई से स्पर्श करती है।

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कॉफी के कप के साथ बैठी एक महिला, डूबती शाम को निहारते हुए जीवन, प्रेम और रिश्तों पर शांत भाव से विचार करती हुई।

ठंडी कॉफी का स्वाद…

“तुम बदल गई हो…” एक साधारण-सा सवाल, लेकिन उसके जवाब में खुलती है जीवन की गहरी समझ। ‘ठंडी कॉफी का स्वाद’ एक ऐसी भावनात्मक कहानी है, जो बताती है कि समय के साथ प्रेम, रिश्ते, सपने और उम्मीदें कैसे परिपक्व हो जाती हैं। यह कहानी सिखाती है कि हर रिश्ता बचाना ज़रूरी नहीं, हर दूरी हार नहीं होती और प्रेम किसी को बाँधने का नाम नहीं, बल्कि मुक्त करने का साहस भी है।

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सिंदूर से रक्त तक: बदलते रिश्तों पर एक मार्मिक कविता

चरित्र का हनन

प्रेम, विश्वास और रिश्तों की डोर जब छल और स्वार्थ के बोझ तले टूट जाती है, तब केवल दो दिल नहीं बिखरते, बल्कि कई परिवारों की खुशियाँ भी उजड़ जाती हैं। ‘चरित्र का हनन’ कविता आधुनिक समाज में बदलती मानसिकता, विश्वासघात और संवेदनाओं के क्षरण पर एक मार्मिक प्रहार है।

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सांझ के समय फूलों से सजे रास्ते पर अपने प्रिय का इंतजार करता एक प्रेमी, जिसकी आँखों में प्रेम और उम्मीद झलक रही है।

उसने कहा…

“उसने कहा… इधर से गुजरेंगे कभी” और तब से दिल ने इंतज़ार के फूल बिछा दिए। यह शायरी प्रेम, प्रतीक्षा और उन आँखों की कहानी है जिनमें सिर्फ एक ही चेहरा बसता है।

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डॉ. अनामिका दूबे ‘निधि’ : शब्दों से जीवन संवारने वाली

साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि संवेदनाओं, संघर्षों और समाज को नई दिशा देने का माध्यम है। शिक्षिका, साहित्यकार और राष्ट्रीय साहित्य नवरत्न मंच की संस्थापिका डॉ. अनामिका दूबे ‘निधि’ ने अपनी लेखनी को केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं बनाया, बल्कि इसे नई प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का मिशन बनाया है। इस विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी साहित्यिक यात्रा, चुनौतियों, पुरस्कारों, डिजिटल युग में साहित्य की बदलती तस्वीर और युवा रचनाकारों के लिए अपने प्रेरक संदेश को बेहद आत्मीयता के साथ साझा किया है।”

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