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लेखिका रीता दास राम का साहित्यिक साक्षात्कार

जब कलम बोलती है…

नौवीं कक्षा से शुरू हुई रीता दास राम की साहित्यिक यात्रा कविता, कहानी, उपन्यास और संपादन तक फैली है। इस साक्षात्कार में उन्होंने साहित्य की सामाजिक जिम्मेदारी, स्त्री-अनुभवों और बदलते समय की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए हैं।

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प्रेम की प्रतीक्षा में खड़ी स्त्री और पलाश के फूलों को दर्शाता भावपूर्ण दृश्य

तुम्हारे ख़्वाबों में आने की चाह

किसी की ज़िंदगी में शामिल होने, उसके मन की ख़ामोशी समझने और उसके ख़्वाबों में जगह पाने की चाह को व्यक्त करती एक संवेदनशील प्रेम कविता।

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रिश्तों में विश्वासघात से दुखी महिला की भावनात्मक तस्वीर

चोर

क्या चोर केवल वही होते हैं, जो घरों से सामान चुराते हैं? कभी-कभी अपने ही किसी के जीवन की सबसे अनमोल खुशियाँ और रिश्ते छीन लेते हैं। ‘चोर’ विश्वासघात, रिश्तों की टूटन और मन की अनकही पीड़ा को उजागर करती एक संवेदनशील कहानी है।

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राष्ट्रीय कवि संगम नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी में उपस्थित साहित्यकार

राष्ट्रीय कवि संगम, नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी संपन्न

राष्ट्रीय कवि संगम, नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी 9 अक्टूबर को केंद्रीय विहार, सीवुड्स में आयोजित हुई। डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद गांई की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में साहित्यकारों ने काव्य पाठ कर राष्ट्र जागरण में कलमकारों की भूमिका पर जोर दिया।

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मेरे हिस्से की पीड़ाएँ हिंदी कविता के भावों को दर्शाता संघर्ष और आत्मबल का दृश्य

मेरे हिस्से की पीड़ाएँ 

मेरे हिस्से की पीड़ाएँ मुझे स्वीकार हैं, क्योंकि संघर्ष से घबराना मेरी प्रकृति नहीं। प्रेम, त्याग और आत्मबल से भरी यह कविता जीवन के हर रण में स्वयं पर विश्वास रखने की बात करती है।

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सर्द रात में चादर में दुबकी अकेली नवविवाहिता और खिड़की पर बैठी चिड़िया

चिड़िया

22 वर्ष की एक नवविवाहिता, दूर-दराज़ के सरकारी अस्पताल में तैनात पति और एक सुनसान सरकारी मकान। पति के दौरे पर चले जाने के बाद अकेलेपन से जूझती उस स्त्री की दुनिया माँ की यादों और किताबों के सहारे चलती है। एक सर्द रात खिड़की के बाहर चिड़िया की आवाज़ उसके भीतर दबे अतीत का ऐसा दरवाज़ा खोल देती है, जहाँ माँ का आँचल, अब्बा का दुलार और बचपन की सुरक्षित दुनिया फिर जीवित हो उठती है।

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स्त्री के संघर्ष और त्याग को कर्ण के रूपक में दर्शाता स्त्री विमर्श

कहाँ आसान है एक स्त्री का कर्ण हो जाना

एक स्त्री अपने जीवन में कितने कवच-कुंडल धारण करती है? प्रेम, जिम्मेदारियों, सामाजिक मर्यादाओं और अपने अस्तित्व के बीच संघर्ष करती स्त्री के अंतर्द्वंद्व को कर्ण के रूपक में प्रस्तुत करता संवेदनशील लेख.

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महादेवी वर्मा की पुण्य स्मृति में विश्व भूषण सम्मान समारोह

लखनऊ में महादेवी वर्मा की पुण्य स्मृति में विश्वभूषण सम्मान समारोह संपन्न

लखनऊ के निराला सभागार में महादेवी वर्मा की पुण्य स्मृति में विश्व भूषण सम्मान समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम में साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही.

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हिंदी भाषा हमारी पहचान और भारतीय संस्कृति का प्रतीक

हिंदी

हिंदी हमारे लिए केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार, आत्मसम्मान और पहचान का प्रतीक है. दिल से दिल का संवाद और अपनेपन का अनुवाद है हिंदी.

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ममता सिंह कवयित्री का साहित्यिक इंटरव्यू

विज्ञान पढ़ा, ज़िंदगी समझी और शब्दों में उतार दी

विज्ञान की शिक्षा से साहित्य की संवेदनाओं तक ममता सिंह की यात्रा बेहद विविध और अनुभवों से भरी है. शिक्षिका, शिक्षक-प्रशिक्षक, कवयित्री और आकाशवाणी कलाकार के रूप में उन्होंने शिक्षा, समाज और साहित्य को करीब से समझा. पढ़िए ममता सिंह से हुई खास बातचीत.

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