रात भर एक करवट है माँ
यह माँ के बिछड़ जाने के बाद भी हर याद, हर एहसास और हर छोटी चीज़ में उनकी मौजूदगी को महसूस करने की मार्मिक अनुभूति को शब्द देता है।

यह माँ के बिछड़ जाने के बाद भी हर याद, हर एहसास और हर छोटी चीज़ में उनकी मौजूदगी को महसूस करने की मार्मिक अनुभूति को शब्द देता है।
यह लेख एक ऐसे अनमोल रिश्ते की भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जहाँ एक लड़की “पार्थ” कहकर केवल पुकारती नहीं, बल्कि टूटते हुए मन को साहस, अपनापन और पहचान भी देती है।
“तोहमत लगा दीजिए” प्रेम, शिकायत और अपनत्व की भावनाओं से सजी एक नाज़ुक ग़ज़ल है, जिसमें रिश्तों की मिठास और दिल की गहराइयों को खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।
‘दिल की तन्हाई’ एक मार्मिक कविता है, जो कवियों के भीतर छिपे दर्द, संवेदनाओं और शब्दों की ताकत को उजागर करती है। कविता बताती है कि कवि अपने जख्मों को कविता में ढाल देते हैं और अपने दर्द को सुरों में सजाकर दुनिया के सामने रखते हैं। वे दूसरों के दुख को इसलिए समझ पाते हैं क्योंकि स्वयं पीड़ा से गुजर चुके होते हैं। इस रचना में कवि मन की गहराई, तन्हाई और भावनात्मक संसार का सुंदर चित्रण किया गया है। यह कविता पाठकों को कवि के अंतर्मन से जोड़ने का कार्य करती है।
‘बसा-बसाया घर’ एक ऐसी मार्मिक लघुकथा है, जिसमें बेटी अपने तलाक के फैसले पर अडिग रहती है। माता-पिता उसे समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बातचीत के दौरान वह उनके अतीत का ऐसा सच सामने रख देती है, जिससे दोनों निरुत्तर हो जाते हैं। कहानी रिश्तों में विश्वास, दोहरे मापदंड और आत्मसम्मान जैसे गंभीर विषयों को उजागर करती है। यह कथा बताती है कि दूसरों को सलाह देना आसान है, लेकिन जब सच सामने आता है तो अपने ही बनाए मूल्य टूट जाते हैं।
यह खूबसूरत ग़ज़ल जीवन के गहरे सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है। इसमें प्रेम, धैर्य, हौसला और आत्मविश्वास का संदेश छिपा है। ज़िन्दगी कठिन हो सकती है, मगर उसे अपनाना ही जीत है। टूटे ख्वाबों के बाद भी हिम्मत बनाए रखना, दिल की हर बात हर किसी से न कहना और रोशनी को बांटते रहना ये ग़ज़ल इन्हीं जीवन मूल्यों को सलीके से सामने लाती है। हर शेर इंसान को भीतर से मजबूत बनने, खुद से जुड़ने और उम्मीद की लौ जलाए रखने की प्रेरणा देता है।
“मुझे मिल गया मन का मीत” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण की गहराई को सुंदर शब्दों में व्यक्त किया गया है। यह कविता एक ऐसे मिलन की अनुभूति कराती है, जहाँ मन को सच्चा साथी मिलता है और जीवन संगीत से भर उठता है। नारी-मन की संवेदनाओं, प्रतीक्षा और पूर्णता का यह काव्यात्मक चित्रण पाठकों को भाव-विभोर कर देता है।
रभि डागर समकालीन हिंदी साहित्य की उन रचनाकारों में हैं, जिनकी लेखनी संवेदनाओं को शक्ति में बदलने की क्षमता रखती है। उनकी रचनाएँ जीवन की सच्चाई, रिश्तों की ऊष्मा और स्त्री-मन की कोमलता को बेहद सहजता से अभिव्यक्त करती हैं। वे अपने आसपास घटित घटनाओं को केवल देखती नहीं, बल्कि उन्हें गहराई से महसूस कर शब्दों में ढाल देती हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ बनावटी नहीं, बल्कि जीवन का सजीव प्रतिबिंब प्रतीत होती हैं।