सुरभि डागर : सादगी, संवेदना और सृजन का सुंदर संगम

कवयित्री सुरभि डागर का रचनात्मक चित्र कवयित्री सुरभि डागर

संवेदनाओं को शक्ति में बदलने वाली लेखिका

आज हम एक अत्यंत संवदेनशील लेखिका से आपका परिचय कराते हैं. उत्तरप्रदेश के बिजनौर जनपद की गौरवशाली परंपरा से जुड़ी सुरभि डागर की रचनाओं में जीवन की सच्चाई और भावनाओं की गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपनी संवेदनाओं को कमजोरी नहीं बनने देतीं, बल्कि उन्हें अपनी रचनात्मक शक्ति में रूपांतरित करती हैं. उनकी लेखनी में कोमलता और दृढ़ता का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है. सुरभि डागर का जन्म 30 जनवरी 1986 को धामपुर तहसील के ग्राम नौघरा में हुआ. बचपन से ही उनके भीतर काव्य-रचना का अंकुर मौजूद था, जो समय के साथ विकसित हुआ.
यद्यपि जीवन की व्यस्तताओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों ने कुछ समय के लिए उनकी रचनात्मक यात्रा को धीमा कर दिया, लेकिन उनके अंदर की संवेदनशीलता और संस्कारों ने इस प्रवाह को कभी समाप्त नहीं होने दिया.
वे अपने आसपास के समाज, संबंधों और जीवन की छोटी-बड़ी घटनाओं को केवल देखती ही नहीं, बल्कि उन्हें गहराई से महसूस करती हैं और फिर उन्हें सजीव शब्दों में व्यक्त करती हैं. उनकी कविताओं में स्त्री-मन की कोमलता, रिश्तों की ऊष्मा और स्मृतियों की भीनी आर्द्रता अत्यंत सहजता से अभिव्यक्त होती है.
वे किसी भी भाव को कृत्रिम या अतिनाटकीय नहीं बनातीं, बल्कि उसे उसी सादगी और सच्चाई के साथ प्रस्तुत करती हैं, जैसी वह वास्तविक जीवन में होती है. सुरभि के माता-पिता, श्री जयकारसिंह डागर और श्रीमती रीना सिंह डागर, ने उन्हें जीवन को समझने और संवेदनशील दृष्टि विकसित करने की प्रेरणा दी. यही कारण है कि उनकी रचनाओं में परिपक्वता और गहराई का सुंदर समावेश देखने को मिलता है. सुरभि बताती है कि उनकी इस साहित्यिक यात्रा में उनके बेटे अंगद का एक विशेष योगदान है.
आज के समय में, जब साहित्य में बनावटीपन का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, उसके विपरीत उनकी लेखनी सच्चाई से जुड़ी है. वे जैसा अनुभव करती है वैसा कागज पर उतार देती है. वे नई पीढ़ी की उन रचनाकारों में हैं, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करते हुए एक सार्थक साहित्यिक सेतु का निर्माण कर रही हैं.
साहित्यिक धारा में उनका योगदान लगातार सुदृढ़ होता जा रहा है. उनकी रचनात्मकता और संवेदनशील दृष्टि भविष्य में हिंदी साहित्य को और समृद्ध करेगी. उम्मीद है उनकी रचनाएं लाइव वायर न्यूज के पटल पर पढ़ने को मिलेगी. हम उनके उज्ज्वल और समृद्धशाली भविष्य की कामना करत हैं. उनके एकल काव्य संग्रह सगुन चिरैया (2022) की बात फिर कभी…

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