काव्य
माँ होना ही कठिन लगा
माँ को बचपन में सिर्फ एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा था, लेकिन समय के साथ समझ आया कि माँ होना संसार का सबसे कठिन और सबसे सुंदर दायित्व है। यह कविता माँ के त्याग, धैर्य और मौन प्रेम को श्रद्धांजलि है।
मन की आवाज़
रात की खामोशी, बारिश की बूंदों और मन के अनकहे एहसासों को समेटे “मध्य रात्रि” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है। यह कविता दर्द, उम्मीद, प्रकृति और आत्मसंवाद के सूक्ष्म स्पर्श को शब्दों में ढालते हुए पाठक को संवेदनाओं की गहराई तक ले जाती है, जहाँ मौन भी अपनी एक भाषा बोलता है।
हो जाओगे लापता
यह कविता प्रेम की पवित्रता, आत्मिक जुड़ाव और भावनाओं की गहराई को खूबसूरती से व्यक्त करती है। इसमें मुहब्बत को वासना से अलग एक रूहानी एहसास के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
“मुझे मिल गया मन का मीत”
“मुझे मिल गया मन का मीत” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण की गहराई को सुंदर शब्दों में व्यक्त किया गया है। यह कविता एक ऐसे मिलन की अनुभूति कराती है, जहाँ मन को सच्चा साथी मिलता है और जीवन संगीत से भर उठता है। नारी-मन की संवेदनाओं, प्रतीक्षा और पूर्णता का यह काव्यात्मक चित्रण पाठकों को भाव-विभोर कर देता है।
सुरभि डागर : सादगी, संवेदना और सृजन का सुंदर संगम
रभि डागर समकालीन हिंदी साहित्य की उन रचनाकारों में हैं, जिनकी लेखनी संवेदनाओं को शक्ति में बदलने की क्षमता रखती है। उनकी रचनाएँ जीवन की सच्चाई, रिश्तों की ऊष्मा और स्त्री-मन की कोमलता को बेहद सहजता से अभिव्यक्त करती हैं। वे अपने आसपास घटित घटनाओं को केवल देखती नहीं, बल्कि उन्हें गहराई से महसूस कर शब्दों में ढाल देती हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ बनावटी नहीं, बल्कि जीवन का सजीव प्रतिबिंब प्रतीत होती हैं।
“मन की देहरी: संवेदनाओं का प्रवेशद्वार”
“‘मन की देहरी’ एक ऐसा काव्य संग्रह है जो पाठक को भीतर तक छू जाता है। पूनम सिंह जी की सरल और भावपूर्ण कविताएँ प्रेम, स्मृति और स्त्री-मन की गहराई को उजागर करती हैं। प्रत्येक पंक्ति जैसे पाठक के अपने अनुभवों का प्रतिबिंब है। एक पुस्तक जो संवेदनाओं और आत्मिक प्रेम का संसार खोलती है।”
विरह
निशा की नीरवता में बैठी नायिका प्रतीक्षा में लिपटी है .हवा में भीगी चाँदनी, शरीर पर ओस की बूँदें जैसे भावना का स्पर्श कर रही हों। वह प्रिय के आगमन की राह में सजी-संवरी है, मानो सावन स्वयं प्रेम का संदेश लेकर आया हो। मन में उमड़ती आशाओं से मोतियों का हार पिरोती, पलकें प्रतीक्षा की लाली से भीग उठी हैं।
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