मन की आवाज़

मध्य रात्रि में बारिश, चांदनी और पेड़ों के बीच भावनात्मक वातावरण दर्शाती हिंदी कविता की कलात्मक छवि।

रेखा हजारिका, लखीमपुर

मध्य रात्रि,
सुनी है कभी बिरछों की वह गान?
बरसाती रिमझिम में
वो लहराए मधुर तान।

सहा है तूने
दर्द भरे लम्हों की
वो मौन मुस्कान?

टिमटिमाती रात में,
पलकों पर बारिश की बूँदें,
चुप गए आँसुओं के स्वर।

देखा है अधखिली कलियों को
धूप में खिलने की चाह लिए,
सुना है कभी
गुनगुनाती पवन को,
बेफिक्र होकर
फुर्र से उड़ते हुए?

ओढ़े आँचल-सी इच्छाएँ,
रखे मन में कई पहर,
धूप की सुनहरी ऊष्मा लपेटे।

देखा है कभी
मौन दिगंत को
बाहों में भरते हुए?

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