Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

तुम लौट आओ…

प्रिय के इंतजार और प्रेम की भावनाओं को दर्शाती रोमांटिक हिंदी कविता की यथार्थवादी छवि।

डॉ. अनामिका दुबे निधि, मुंबई

यूँ तो एक अरसे से हमने आईना नहीं देखा,
तुम लौट आने का वादा करो, हम संवर लेंगे।

यूँ तो मेरे चेहरे की रंगत खो-सी गई है मानो,
तुम्हारा दीदार तो हो, हम निखर लेंगे।

तेरे बिना ये शामें भी वीरान-सी लगती हैं,
तू साथ बैठ जाए तो मौसम बदल लेंगे।

कितने ही दर्द चुपके से दिल में उतर आए,
तेरे एक लफ़्ज़ पर मगर सब भूल चलेंगे।

अब तक जो अधूरी-सी पड़ी है मेरी दुनिया,
तुम हाथ थाम लो तो हम मुकम्मल हो लेंगे।

सूखी हुई आँखों में फिर ख़्वाब उतर आएँगे,
तुम लौट कर आओ तो हम फिर से हँस लेंगे।
इन रचनाओं को भी पढ़ें और अपनी राय अवश्य व्यक्त करें


किताब दिल में, लैपटॉप हाथ में
“नारी केवल देह नहीं”
एक मध्यमवर्गीय की दास्तान
तुम लौट आओ…
तेरे खत
मन की आवाज़
रुह का रिश्ता

2 thoughts on “तुम लौट आओ…

  1. तुम लौट आओ कविता
    बहुत ही सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *