मोहब्बत, खामोशी और कसक
कभी-कभी मोहब्बत शब्दों से नहीं, खामोशियों से समझ आती है। सामने वाला साथ होने का दावा करता है, लेकिन हर भीड़ में एक अजीब-सी तन्हाई घिर आती है। यादें तस्वीरों में कैद तो हो जाती हैं, मगर उनमें छिपी खाली जगह हर बार दिल को चुभती है। शायद यही इश्क़ की सच्चाई है जहाँ चाहत तो पूरी होती नहीं, और उसकी कसक हर पल साथ चलती रहती है।
