Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

एक औरत

स्त्री का संवेदनशील चित्रणजो हर मौसम में दूसरों के लिए बदलती है

अर्चना जैन, जयपुर

एक औरत
मुस्कुराते हुए बन जाती है
तुम्हारे लिए जाड़े की धूप।

एक औरत
मुस्कुराते हुए बन जाती है
तुम्हारे लिए तपती दुपहरी की छाँव।

एक औरत
मुस्कुराते हुए बन जाती है
तुम्हारे लिए बसंती पीले फूल।

एक औरत
मुस्कुराते हुए बन जाती है
तुम्हारे लिए सावन की पहली फुहार।

एक औरत
मुस्कुराते हुए ढाल लेती है खुद को
तुम्हारी ज़रूरत के हर मौसम में।

पर क्या तुम ढाल सकते हो खुद को
उसकी मुस्कुराहट के लिए?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *