एस. एम. जोशी ऑडिटोरियम, पुणे में होने वाले सृजन महोत्सव के दौरान लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दृश्य।

कला, संस्कार और समाज का संगम

पुणे में आने वाले दिनों में कला, संस्कृति और सामाजिक सरोकार का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। सृजन फाउंडेशन की ओर से 13 से 15 जनवरी तक तीन दिवसीय ‘सृजन महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव अपने 10वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और इस बार नवी पेठ स्थित एस. एम. जोशी ऑडिटोरियम में प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक आयोजित होगा।

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इंजीनियर भावना और मैनेजर यश का सम्मान

सांताक्रूज़ पश्चिम में आयोजित कार्यक्रम में ऑल इंडिया यादव महासभा, मुंबई ने सामाजिक कार्यों में सक्रिय इंजि. भावना और प्रबंधक यश का सम्मान किया। समारोह में चंद्रवीर बंशीधर यादव, गिरधारीलाल पंडित, डॉ. अमर बहादुर पटेल और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम समाज में सकारात्मक योगदान देने वालों को प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया।

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बचपन को बाँहों में भर लो…

बच्चे रंग, खुशबू और उम्मीदों से भरे उस चमन के फूल हैं जिनकी नर्म हथेलियों पर उनकी पूरी तकदीर लिखी होती है। कहीं धूल-भरी मुट्ठियाँ हैं, कहीं हँसी से भरा बालपन और कहीं वही बचपन घरों में कैद होकर बहेलियों की निगाहों से डरता है। उनके मस्तक वात्सल्य से भीगने के लिए बने हैं, न कि भय से काँपने के लिए। पर सच यह है कि कुछ बच्चे शिक्षा के मंदिरों में बैठते हैं, जबकि कुछ बाहर मायूस खड़े रह जाते हैं.

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खामोश चीख और मां का विश्वास

शुरू शुरू में मुझे विवेक सर से बहुत डर लगता था लेकिन धीरे-धीरे मुझे उनके स्पर्श की आदत हो गई और मैं उनके साथ सहज होने लगी थी, मुझे नहीं पता कि वह स्पर्श मुझे अच्छा लगता था या बुरा लगता था ? मां को बताना चाहती थी पर डरती थी , सोचती थी मां पापा मेरे बारे में क्या सोचेंगे ….. क्या विवेक सर मुझे प्यार करते हैं ? …… कैसा प्यार है यह ?

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