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हिंदी भाषा हमारी पहचान और भारतीय संस्कृति का प्रतीक

हिंदी

हिंदी हमारे लिए केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार, आत्मसम्मान और पहचान का प्रतीक है. दिल से दिल का संवाद और अपनेपन का अनुवाद है हिंदी.

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हिंदी भाषा और हिंदी शिक्षकों की उपेक्षा पर लेख

हिंदी से परहेज क्यों ?

अंग्रेजी सीखना गलत नहीं, लेकिन क्या आधुनिकता की दौड़ में हिंदी से दूरी बनाना सही है? हिंदी शिक्षकों की उपेक्षा, हिंग्लिश के बढ़ते चलन और बदलती शिक्षा व्यवस्था पर एक विचारोत्तेजक लेख.

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सुनहरी किनारी हिंदी कहानी में बच्ची की रानी वाली पोशाक सिलता दर्जी

सुनहरी किनारी

एक छोटी बच्ची की फैंसी ड्रेस ठीक कराने के लिए माँ पुराने दर्जी शेरा भाई के पास पहुँचती है. एक पुरानी पोशाक में लगी सुनहरी किनारी सिर्फ ड्रेस नहीं सँवारती, बल्कि माँ की सोच को भी एक नई दिशा देती है.

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स्थानांतरण पर हिंदी कविता में अनजाने शहर और नए रिश्ते

स्थानांतरण

हर बार एक अनजाने शहर में पहुँचकर लोगों के बीच अपना बन जाना और फिर दूसरे शहर की ओर चल देना. ‘स्थानांतरण’ कविता बदलते शहरों और बनते रिश्तों की भावनात्मक कहानी है.

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ममता सिंह कवयित्री का साहित्यिक इंटरव्यू

विज्ञान पढ़ा, ज़िंदगी समझी और शब्दों में उतार दी

विज्ञान की शिक्षा से साहित्य की संवेदनाओं तक ममता सिंह की यात्रा बेहद विविध और अनुभवों से भरी है. शिक्षिका, शिक्षक-प्रशिक्षक, कवयित्री और आकाशवाणी कलाकार के रूप में उन्होंने शिक्षा, समाज और साहित्य को करीब से समझा. पढ़िए ममता सिंह से हुई खास बातचीत.

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दिल की बात हिंदी कविता

दिल की बात

“दिल की बात” रिश्तों में छिपे उन एहसासों की कविता है, जिन्हें शब्दों में कहना हमेशा आसान नहीं होता. प्रेम, शिकायत, इंतज़ार और याद के बीच मन की कई अनकही बातें इस कविता में सहज रूप से सामने आती हैं.

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अँधियारे में पूनम हिंदी प्रेम कविता

अँधियारे में पूनम

अँधियारे में पूनम एक भावपूर्ण हिंदी प्रेम कविता है, जिसमें ख़ामोशी, दूरी, याद और अधूरे रिश्ते की भावनाएँ दिखाई देती हैं. कविता उस रिश्ते की कहानी कहती है, जहाँ दोनों एक-दूसरे से दूर होकर भी भावनाओं और यादों के स्तर पर जुड़े रहते हैं.

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नृत्य मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाती महिला

समर्पण

परिवार के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाली शकुंतला को कभी सम्मान नहीं मिला. लेकिन नृत्य के प्रति उसका समर्पण उसे अपनी पहचान और सम्मान दिलाता है.

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ब्रह्मपुत्र की बाढ़ के बीच माजुली में संघर्ष करता परिवार

दिखौ शांत होगा

‘दिखौ की बाढ़ के बीच पिता के संघर्ष और माजुली के जीवन की पीड़ा को समेटती कविता ‘दिखौ शांत होगा’ प्रकृति के शांत होने की उम्मीद और मानवीय जिजीविषा की कहानी कहती है.

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