सतुआनी पर्व 2026 का दृश्य जिसमें लोग सत्तू, चोखा, चटनी और पारंपरिक भोजन के साथ नई फसल की खुशियाँ मना रहे हैं

सतुआनी पर्व

सतुआनी पर्व पर आधारित यह कविता नई फसल की खुशियाँ, सत्तू के महत्व और भारतीय परंपरा की सुंदर झलक प्रस्तुत करती है। यह पर्व प्रकृति, स्वास्थ्य और संस्कृति का अद्भुत संगम है।

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अंधेरी गली में भूखा बच्चा, पृष्ठभूमि में झगड़ा और सामने जलता हुआ दीया, जो उम्मीद का प्रतीक है.

चीखती इंसानियत

यह कविता इंसानियत के दर्द, टूटते रिश्तों और बढ़ती नफरत की सच्चाई को उजागर करती है, लेकिन साथ ही करुणा, प्रेम और संवेदना के जरिए बदलाव की उम्मीद भी जगाती है.

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आत्मविश्वास से भरी महिला, आईने के सामने खड़ी, अपनी पहचान और सच्चाई को दर्शाती हुई

कविता हूँ मैं

कविता हूँ मैं’ एक सशक्त और बेबाक रचना है, जो स्त्री के आत्मसम्मान, पहचान और सच को उजागर करती है। यह कविता समाज की संकीर्ण सोच पर तीखा प्रहार करते हुए खुद को आईने की तरह प्रस्तुत करती है, जो सच्चाई को ज्यों का त्यों दिखाती है।

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घर में अकेली बैठी एक बुजुर्ग महिला, खिड़की से आती रोशनी के बीच उदासी और अकेलेपन का भाव

मां की खुशी

‘मां की खुशी’ एक मार्मिक लघु कहानी है, जो माता-पिता के त्याग, उनके अकेलेपन और समाज के डर के बीच उनकी खुशियों के अधिकार को उजागर करती है। यह कहानी रिश्तों की सच्चाई और बदलती सोच को बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है।

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वृंदावन में संध्या समय बांसुरी बजाते कृष्ण और लज्जा से झुकी नजरों के साथ खड़ी राधा का दिव्य दृश्य

लज्जा

‘लज्जा’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, सौंदर्य और भावनात्मक गहराई को बेहद सुंदरता से प्रस्तुत करती है। इसमें लज्जा, भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम है, जो पाठक को वृंदावन की मनमोहक और आध्यात्मिक दुनिया में ले जाता है।

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थका हुआ व्यक्ति शांत वातावरण में बैठा, सामने हल्की रोशनी के साथ सुकून और ठहराव का प्रतीकात्मक दृश्य

मौत का आलिंगन

यह कविता जीवन के संघर्ष, थकान और मृत्यु के सुकून भरे आलिंगन को गहराई से प्रस्तुत करती है। इसमें दर्द, जिम्मेदारियां और अंततः मिलने वाली शांति का ऐसा चित्रण है, जो पाठक को सोचने और आत्ममंथन करने पर मजबूर कर देता है।

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कनॉट प्लेस में रंग-बिरंगे पंखे बेचती एक छोटी लड़की, मासूम आंखों और श्रम से भरी हथेलियों के साथ

वो लड़की

‘वो लड़की’ कविता एक मासूम बच्ची के संघर्ष, श्रम और सपनों को बेहद संवेदनशीलता से चित्रित करती है। उसकी छोटी-सी दुनिया में छिपी बड़ी संभावनाएं और भावनाएं पाठक को गहराई से छू जाती हैं, और समाज की सच्चाई को उजागर करती हैं।

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रात के आकाश के नीचे अकेला बैठा व्यक्ति, सितारों की ओर देखते हुए, चेहरे पर उदासी और जुदाई का भाव

अधूरा आशियाना

यह ग़ज़ल मोहब्बत, जुदाई और दिल की कश्मकश को बेहद खूबसूरती से बयां करती है। हर शेर में बिछड़ने का दर्द, इंतजार और यादों की टीस झलकती है, जो पाठक को भावनाओं की गहराई में डूबने पर मजबूर कर देती है।

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महिला खिड़की के पास बैठकर कविता संग्रह पढ़ते हुए, चेहरे पर हल्की मुस्कान और आंखों में भावनात्मक गहराई, आसपास गर्म धूप और यादों से भरा शांत वातावरण

उत्तर दो समय: संवेदनाओं और प्रेम का काव्य संसार

उत्तर दो समय’ सविता मिश्रा का एक भावनात्मक कविता संग्रह है, जिसमें दांपत्य प्रेम, स्त्री जीवन, स्मृतियों और संवेदनाओं का सजीव चित्रण मिलता है। यह संग्रह पाठकों को भावनाओं की गहराई में ले जाकर जीवन के अनेक रंगों से परिचित कराता है।

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Asha Bhosle क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर मैच देखते हुए, पृष्ठभूमि में Sachin Tendulkar बल्लेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

स्मृति शेष-क्रिकेट की दीवानी थी आशा भोसले

दिग्गज गायिका Asha Bhosle का क्रिकेट प्रेम भी उतना ही खास रहा है जितना उनका संगीत. ट्विटर जॉइन करते ही उन्होंने सबसे पहले Sachin Tendulkar को फॉलो किया, जबकि बचपन में वह अपनी मां के साथ स्टेडियम में बैठकर पूरे पांच दिनों तक टेस्ट मैच देखा करती थीं.

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