हिंदी मन की भाषा
हिंदी मन की भाषा’ हिंदी के प्रति प्रेम, अपनी मिट्टी, संस्कृति और भावनात्मक पहचान को व्यक्त करती संवेदनशील कविता है.

हिंदी मन की भाषा’ हिंदी के प्रति प्रेम, अपनी मिट्टी, संस्कृति और भावनात्मक पहचान को व्यक्त करती संवेदनशील कविता है.
अंग्रेजी सीखना गलत नहीं, लेकिन क्या आधुनिकता की दौड़ में हिंदी से दूरी बनाना सही है? हिंदी शिक्षकों की उपेक्षा, हिंग्लिश के बढ़ते चलन और बदलती शिक्षा व्यवस्था पर एक विचारोत्तेजक लेख.
एक छोटी बच्ची की फैंसी ड्रेस ठीक कराने के लिए माँ पुराने दर्जी शेरा भाई के पास पहुँचती है. एक पुरानी पोशाक में लगी सुनहरी किनारी सिर्फ ड्रेस नहीं सँवारती, बल्कि माँ की सोच को भी एक नई दिशा देती है.
हर बार एक अनजाने शहर में पहुँचकर लोगों के बीच अपना बन जाना और फिर दूसरे शहर की ओर चल देना. ‘स्थानांतरण’ कविता बदलते शहरों और बनते रिश्तों की भावनात्मक कहानी है.
विज्ञान की शिक्षा से साहित्य की संवेदनाओं तक ममता सिंह की यात्रा बेहद विविध और अनुभवों से भरी है. शिक्षिका, शिक्षक-प्रशिक्षक, कवयित्री और आकाशवाणी कलाकार के रूप में उन्होंने शिक्षा, समाज और साहित्य को करीब से समझा. पढ़िए ममता सिंह से हुई खास बातचीत.
“दिल की बात” रिश्तों में छिपे उन एहसासों की कविता है, जिन्हें शब्दों में कहना हमेशा आसान नहीं होता. प्रेम, शिकायत, इंतज़ार और याद के बीच मन की कई अनकही बातें इस कविता में सहज रूप से सामने आती हैं.
अँधियारे में पूनम एक भावपूर्ण हिंदी प्रेम कविता है, जिसमें ख़ामोशी, दूरी, याद और अधूरे रिश्ते की भावनाएँ दिखाई देती हैं. कविता उस रिश्ते की कहानी कहती है, जहाँ दोनों एक-दूसरे से दूर होकर भी भावनाओं और यादों के स्तर पर जुड़े रहते हैं.
‘दिखौ की बाढ़ के बीच पिता के संघर्ष और माजुली के जीवन की पीड़ा को समेटती कविता ‘दिखौ शांत होगा’ प्रकृति के शांत होने की उम्मीद और मानवीय जिजीविषा की कहानी कहती है.