
नीलम पेड़ीवाल, जमशेदपुर (झारखण्ड)
जीवन अक्सर संघर्षों से भरा होता है, जिसमें अगले पल क्या होने वाला है, यह किसी को पता नहीं होता। जिन लोगों को मजबूती से जीना आता है, वे हर मुसीबत को पार कर जाते हैं और जो उससे घबराते हैं, वे हमेशा पीछे रह जाते हैं।
जो आधे-अधूरे मन से कार्य करते हैं, वे हार जाते हैं और दृढ़ हौसले वाले हमेशा जीत जाते हैं। यदि हम जी-जान से मेहनत करें तो देर-सवेर उसका सुफल अवश्य मिलता है। जैसे किसी बड़े कार्य को हम मिलकर करते हैं, तो वह आसानी से पूर्ण हो जाता है।
इसी प्रकार यदि हम सब मिलकर रहें, तो कोई विवाद ही न हो। जैसे पाँचों अँगुलियों को बंद करके मुट्ठी मज़बूत बन जाती है, उसी तरह यदि हम मिलकर आगे बढ़ें, तो एक मिसाल कायम कर सकते हैं।
एक बार की बात है। मेरी कक्षा में एक लड़की थी, जिसका नाम सीमा था। वह हमेशा डरी-डरी-सी रहती थी। विद्यालय की किसी भी प्रतियोगिता में भाग नहीं लेती थी, क्योंकि उसे स्वयं पर भरोसा नहीं था। एक दिन मैंने उसे समझाया, “तुम इतनी होनहार हो, तुम्हें अपनी प्रतिभा लोगों को दिखानी चाहिए। तुम डरना छोड़ो, अपनी योग्यता को पहचानो और आगे बढ़ो। हम सब तुम्हारे साथ हैं।”
इसके बाद हम सब उसके साथ मिलकर कार्य करने लगे। शनैः-शनैः उसमें भी हिम्मत आ गई और वह नए-नए सोपानों को छूने लगी। एक-दूसरे का साथ देकर हम आगे बढ़ सकते हैं और जन-जन में एकता के प्रतीक बन सकते हैं।
अक्सर लोग दूसरों की मदद करने से घबराते हैं कि कहीं वे स्वयं किसी परेशानी में न फँस जाएँ। आज के समय में कई लोग तमाशबीन बनकर देखते रहते हैं। उन्हें लगता है कि यदि वे किसी का साथ देंगे, तो शायद उन पर भी मुसीबत आ सकती है। यदि सब लोग ऐसा ही सोचने लगें, तो जीवन में कोई भी एक-दूसरे की सहायता नहीं कर पाएगा।
इसलिए मैं अपने साथियों से कहना चाहती हूँ कि हमें कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना है और लोगों को समझाना है कि जो कार्य मिलकर किया जा सकता है, वह अकेले संभव नहीं होता।
आओ, दोस्तों! हम मिलकर आगे बढ़ें और दूसरों तक भी यह शुभ संदेश पहुँचाएँ।
मिलकर रहने से सदा, पूरण होते काम।
मीत! कठिन संघर्ष से, जग में होता नाम।।
