वैवाहिक समारोह में पार्ट टाइम काम करता होटल मैनेजमेंट का मेहनती युवा

नयी उम्मीद

एक वैवाहिक समारोह में मिले मेहनती युवक की प्रेरक कहानी, जो होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम कर रहा है. यह कहानी आज के युवाओं के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है.

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ग्रामीण बच्चों के साथ प्रदीप लोखंडे, पोस्टकार्ड मैन ऑफ इंडिया

पोस्टकार्ड से जागा ग्रामीण भारत

पुणे के सामाजिक उद्यमी प्रदीप लोखंडे ने पोस्टकार्ड और पुस्तकों के माध्यम से ग्रामीण भारत में पढ़ने की संस्कृति विकसित की और लाखों बच्चों का भविष्य बदला।

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सौ सुनार की, एक लोहार की !

जब समाज सवाल करता है, तब एक माँ का विश्वास ही बेटी की सबसे बड़ी ताकत बनता है। तानों और वर्जनाओं के बीच पली उम्मीदें जब मुकाम तक पहुँचती हैं, तो हर बंद उँगली अपने आप हट जाती है और सपने इतिहास बन जाते हैं।

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जड़ें और बेलें

यह कथा कार्यस्थल पर छिपे शोषण और नकली सहयोग की पहचान कराती है। अमरबेल के सशक्त प्रतीक के माध्यम से यह संदेश देती है कि जिनकी अपनी जड़ें नहीं होतीं, वे दूसरों की मेहनत से पनपते हैं। आत्मबोध और सीमाएँ तय करना ही आत्मरक्षा और सशक्तिकरण का पहला कदम है।

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रेशमी कंबल

मीनाक्षी वर्मा, लेखिका, नई दिल्ली बहुत पुराने वक्त की बात है। सीताराम नाम का एक आदमी झोपड़ी में रहता था और मजदूरी किया करता था। एक बार मजदूरी करते वक्त उसने एक आदमी को रश्मि कम्बल बेचते देखा। कम्बल देखकर उसका उसे खरीदने का मन हुआ, लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे।वह घर आकर भी…

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स्वाभिमान

हर रोज मैट्रो स्टेशन पर भीख मांगती वह अंधी भिखारन मेरी नजरों के सामने होती।
एक दिन उसकी तबियत ठीक न होने पर मैंने देखा कि उसकी देखभाल एक जवान लड़की कर रही थी। कई सालों के दर्द और असहायता के बावजूद, उस बच्ची ने उसकी सेवा को अपना स्वाभिमान बना लिया। भीख मांगना नहीं, बल्कि सहयोग और मानवता की यही असली पहचान है।

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बहू नहीं कोई देवी हो

यह कहानी नारी के कर्तव्य, परिश्रम और ससुराल में सम्मान पाने की प्रेरक कहानी है। नीरा, स्वभाव से मेहनती, संवेदनशील और न्यायप्रिय, अपने सास-ससुर के प्रति समर्पित रहती है। शादी के बाद पति के ड्यूटी पर चले जाने के बावजूद वह अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होती।

कठोर व्यवहार और अन्याय के बावजूद नीरा अपने नेकनीयती और परिश्रम से अपने सास-ससुर को उचित सम्मान दिलाती है। उसके इस समर्पण और अपनापन को देखकर परिवार और समाज भी उसे आदर और सम्मान देने लगते हैं। कहानी में नारी शक्ति, सशक्तता और पारिवारिक प्रेम का संदेश प्रमुख रूप से उजागर है।

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बस अब और नहीं 

सान्वी ने सुबह की सारी व्यस्तताओं से निवृत्त होकर बालकनी में बैठकर बारिश की बूंदों को निहारना शुरू किया। उसी समय उसके भीतर लंबे समय से चल रहे संघर्ष और आंतरिक तूफ़ान ने नया रूप ले लिया। अतीत के घाव, निराशा और खुद से होने वाली आत्मग्लानि ने उसे झकझोर दिया। और तभी उसने ठान लिया. बस, अब और नहीं!”उसने अपने अनवरत युद्ध को विराम देने का साहस जुटाया, और अपने अंतर्मन पर पूर्ण नियंत्रण पाकर आत्मा की जीत का अनुभव किया।

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