गर्मी की छुट्टियां
यह बाल कहानी आरव की गर्मी की छुट्टियों, नानी के गांव और दोस्ती के खजाने की खोज के जरिए बच्चों को यादों, मित्रता और खुशियां बांटने का सुंदर संदेश देती है।

यह बाल कहानी आरव की गर्मी की छुट्टियों, नानी के गांव और दोस्ती के खजाने की खोज के जरिए बच्चों को यादों, मित्रता और खुशियां बांटने का सुंदर संदेश देती है।
उम्र के गणित” एक संवेदनशील हिंदी कहानी है, जो प्रेम, उम्र और सामाजिक सोच के बीच चलने वाले संघर्ष को दर्शाती है। कहानी में एक युवक अपने सच्चे प्रेम का इज़हार करता है, लेकिन उम्र के अंतर के कारण उसे स्वीकार नहीं किया जाता। समय बीतने के बाद एहसास होता है कि प्रेम उम्र का नहीं, भावनाओं और समझदारी का विषय है। संवादों और भावनात्मक घटनाओं से सजी यह कहानी पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि कई बार हम समाज के गणित में दिल की सच्चाई खो देते हैं।
“शर्मिंदा” एक मार्मिक हिंदी लघुकथा है, जो समाज की संवेदनहीनता और दिखावटी व्यवहार पर गहरा प्रहार करती है। बस में खड़ी एक गर्भवती मजदूर महिला को कोई सीट नहीं देता, लेकिन कुछ युवाओं का व्यवहार कॉलेज लड़कियों के आते ही बदल जाता है। तभी एक समझदार लड़की इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए महिला को सीट पर बैठा देती है। यह छोटी-सी घटना बड़े सामाजिक संदेश के साथ सामने आती है। कहानी बताती है कि सम्मान रूप देखकर नहीं, जरूरत देखकर देना चाहिए। यह लघुकथा पाठकों को आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है।
उपहार एक मार्मिक लघुकथा है, जो बाहरी रूप और सामाजिक धारणाओं से ऊपर उठकर इंसानियत का संदेश देती है। सुनीति, कल्पना और जतिन के संवादों के माध्यम से कहानी बताती है कि हर व्यक्ति को उसके रूप से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और भावनाओं से परखना चाहिए। जहां एक ओर दिखावटी उपहार अस्वीकार हो जाता है, वहीं स्नेह, सम्मान और भाईचारे का भाव सबसे बड़ा उपहार बनकर सामने आता है। यह कहानी पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि असली सुंदरता मन और नीयत में होती है।
यह प्रेरक कहानी योगेंद्र पोरवाल की है, जिन्होंने मात्र 16 वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद जिम्मेदारियाँ संभालीं और छोटी सी दुकान से सफर शुरू किया। समय के साथ बदलाव अपनाते हुए उन्होंने संघर्ष, मेहनत और दूरदर्शिता से 30 वर्षों में सफलता की मजबूत पहचान बनाई।
“अरे काकी, तुम्हें नहीं मालूम क्या? बंसी का बेटा कलेक्टर बन गया है…” संध्या की बात सुनते ही जानकी काकी की आँखों में चमक आ गई। दिन-रात ऑटो चलाकर बेटे को पढ़ाने वाले बंसी की तपस्या आज रंग लाई थी। जब मीडिया ने बेटे से उसकी सफलता का श्रेय पूछा, तो उसने बिना झिझक कहा—“मेरे बाउजी… क्योंकि फल की पहचान हमेशा पेड़ से ही होती है।” यह सुनकर बंसी की आँखों से आँसू बह निकले, और आसपास खड़ी भीड़ तालियों से गूंज उठी। यह सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस संघर्ष, त्याग और प्रेम का प्रमाण है, जो एक पिता अपने बच्चे के लिए जीता है।
रुचि अग्रवाल की यह प्रेरक कहानी बताती है कि कैसे एक गृहिणी ने जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा और लेखन, वीडियो क्रिएशन व वॉइस ओवर के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। सिलीगुड़ी की निवासी रुचि आज एक सफल लेखिका हैं, जिनकी पुस्तक “बातें कुछ अनकही सी” प्रकाशित हो चुकी है और वे 25 से अधिक एंथोलॉजी का हिस्सा हैं। यह कहानी हर महिला के लिए प्रेरणा है जो अपनी पहचान बनाना चाहती है।
देहरादून की शांत वादियों से उठी एक आवाज़ आज समाज की सोच को चुनौती दे रही है. यह कहानी है लक्ष्मी कीभारत की पहली सर्टिफाइड दृष्टि दिव्यांग (विजुअली इम्पेयर्ड) रेडियो जॉकी, जिन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि समाज के स्थापित पूर्वाग्रहों को भी तोड़ने का साहस दिखाया.
एक वैवाहिक समारोह में मिले मेहनती युवक की प्रेरक कहानी, जो होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम कर रहा है. यह कहानी आज के युवाओं के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है.
पुणे के सामाजिक उद्यमी प्रदीप लोखंडे ने पोस्टकार्ड और पुस्तकों के माध्यम से ग्रामीण भारत में पढ़ने की संस्कृति विकसित की और लाखों बच्चों का भविष्य बदला।