
मधु मिश्रा
सिटी बस में एक मज़दूर प्रेग्नेंट महिला चढ़ी। चढ़ते ही उसने भीतर चारों ओर अपनी नज़र दौड़ाई। देखा, कोई भी सीट खाली नहीं थी। सीट पर बैठे अधिकतर यात्री अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त थे और जिनके पास फोन नहीं था, वे ऊँघ रहे थे। यह देख उसने अपने आपको एक सीट से मज़बूती से टिकाया और बस की ऊपरी रॉड पकड़कर खड़ी हो गई।
थोड़ी ही देर बाद बस कुछ आगे जाकर रुकी, तो उसमें कॉलेज की कोई चार-पाँच लड़कियाँ चहकते हुए चढ़ीं। अब उनके आते ही बस का मौसम ही बदल गया। मोबाइल पर व्यस्त लोगों की नज़रें अब लड़कियों पर थीं और ऊँघते लोगों की निगाहें भी उन्हीं पर ही टिक गईं।
और अब तो गज़ब ही हो गया। सीट पर बैठे कुछ युवा लड़कियों को अपनी सीट पर बैठने का ऑफर देने लगे। तभी एक लड़की ने सीट का यह निमंत्रण मुस्कराते हुए स्वीकार किया और “थैंक यू!” कहते हुए पास खड़ी मज़दूर प्रेग्नेंट महिला का हाथ थामकर उसे सीट पर बिठा दिया। फिर अपने बैग से पानी की बोतल उसे पकड़ाते हुए खुद उसके पास ही खड़ी हो गई।
प्रेग्नेंट महिला अब उस लड़की को बार-बार धन्यवाद देने लगी, तो वह लड़की बोली, “अरे धन्यवाद मुझे नहीं, इन भाई साहब को दो!” यह कहना था कि सीट के पास खड़ा युवक खिसिया कर बोला, “अरे हमें धन्यवाद… नहीं-नहीं…!”
पर हकीकत में उस युवा के साथ-साथ शर्मिंदगी बस के बहुत से लोगों के चेहरे पर आसानी से पढ़ी जा सकती थी।
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Bahut badhiya kahani
यह कहानी पढ़ कर तो मज़ा ही आ गया
बहुत बढ़िया कहानी👌