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शिक्षक का हाथ थामकर जिंदगी बदलने का वादा करता विद्यार्थी

वादा

जतिन के भीतर बहुत कुछ बदल चुका था. दोस्तों की संगत, धोखे और अवसाद ने उसे भीतर से तोड़ दिया था. लेकिन एक शिक्षक ने उसकी आँखों में छिपे दर्द को पहचानकर उससे सिर्फ़ एक वादा माँगा—अपनी जिंदगी को बिखरने नहीं देने का.

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शगुन अपने माता-पिता के साथ नए घर के सामने भावुक और खुश नजर आती हुई

फ़िज़ा गुलज़ार हो उठी

गरीबी और संघर्षों के बीच पली शगुन ने मेहनत के दम पर अपने माता-पिता के लिए सपनों का घर बनाया. लेकिन प्रेम और विवाह के सवाल पर उसका मन अब भी उलझा हुआ था. एक घटना ने उसके रिश्ते को नई दिशा दे दी.

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पत्नी की याद में अकेला बैठा व्यक्ति और उसके सामने रखी कुर्सी, भावुक प्रेम कहानी

…गर तुम साथ हो

वाणी को गए दो साल हो चुके थे, लेकिन सारंग उसे भूल नहीं पाया था। फिर एक दिन उसे 52 लिफाफों वाला एक डिब्बा मिला, जिसे वाणी उसके लिए छोड़ गई थी। हर रविवार खुलने वाला एक लिफाफा उसे धीरे-धीरे फिर से जीना सिखाने लगा।

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परिवार के बीच अपनी पीड़ा छिपाती भावुक भारतीय महिला की यथार्थवादी छवि

विष वमन

राजेश्वरी ने परिवार की खुशियों के लिए अपनी पीड़ा को वर्षों तक भीतर दबाए रखा। रिश्तों में मिले विश्वासघात और शोषण का विष आखिर कितना सहा जा सकता है? यह कहानी उसी अनकही पीड़ा और मौन आह की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

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मीरा तुम कहाँ हो? एक अधूरी दोस्ती और आदिवासी लड़की के संघर्ष की मार्मिक कहानी

मीरा तुम कहाँ हो

तीन दशक पहले मिली एक आदिवासी लड़की मीरा, जो पढ़ाई में बेहद होशियार थी और जीवन में आगे बढ़ना चाहती थी। लेकिन परिस्थितियों ने उसकी राह रोक दी। वर्षों बाद हुई एक मुलाकात ने दोस्ती, सपनों और बिछड़ने की ऐसी कहानी छोड़ दी, जिसका सवाल आज भी कायम है मीरा तुम कहाँ हो?

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42 साल बाद अपनी बचपन की सहेली के घर पहुँची महिला का भावुक क्षण

अधूरी मुलाक़ात

42 वर्षों बाद बचपन की सहेली से मिलने पहुँची एक महिला अपने साथ ढेरों यादें लेकर आई थी, लेकिन दरवाज़े पर मिला एक सच उसकी पूरी दुनिया को स्तब्ध कर गया। दोस्ती, स्मृतियों और बिछड़न की यह मार्मिक लघुकथा दिल को छू जाती है।

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दो सखियों के बीच गहरी दोस्ती और आत्मीय रिश्ते को दर्शाता दृश्य

दो दिलों की खूबसूरत दोस्ती

कुछ रिश्ते खून के नहीं होते, फिर भी वे जीवन के सबसे करीब बन जाते हैं। यह कहानी है एक ऐसी सखी की, जिसके साथ ने दोस्ती को विश्वास, अपनापन और आत्मीयता का रूप दिया। जीवन की व्यस्तताओं के बीच मिला यह रिश्ता ईश्वर के दिए अनमोल उपहार जैसा महसूस होता है।

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मुस्कुराती बुज़ुर्ग माँ अपने बेटे-बहू के साथ घर के आँगन में खड़ी, परिवार के अपनापन और सुरक्षा का भावनात्मक दृश्य।

“छटती धुंध”

समाचारों में बुज़ुर्गों के साथ बढ़ते अत्याचार की खबरें मन में भय और भविष्य की चिंता भर देती हैं। लेकिन एक दिन बेटे-बहू का लिया गया छोटा-सा निर्णय एक माँ के जीवन की सारी धुंध छाँट देता है। पढ़िए “छटती धुंध”, परिवार, अपनत्व और बुज़ुर्गों के सम्मान का मार्मिक संदेश देती एक भावनात्मक लघुकथा।

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होटल के बाहर भूखी वृद्धा को रोटी देता हुआ एक बच्चा – इंसानियत पर आधारित भावुक हिंदी लघुकथा

सुकून

होटल में बैठा एक परिवार तरह-तरह की रोटियों का ऑर्डर दे रहा था। तभी पिता बाहर मिली एक भूखी वृद्धा का ज़िक्र करते हैं, जो केवल एक सूखी रोटी की आस लगाए बैठी थी। यह सुनकर बेटा चुपचाप अपनी प्लेट से रोटियाँ लेकर बाहर चला जाता है। लौटते समय उसके शब्द सभी के दिल को छू लेते हैं रोटी का असली स्वाद उसकी किस्म में नहीं, बल्कि किसी भूखे का पेट भरने के बाद मिलने वाले सुकून में होता है।

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कॉफी के कप के साथ बैठी एक महिला, डूबती शाम को निहारते हुए जीवन, प्रेम और रिश्तों पर शांत भाव से विचार करती हुई।

ठंडी कॉफी का स्वाद…

“तुम बदल गई हो…” एक साधारण-सा सवाल, लेकिन उसके जवाब में खुलती है जीवन की गहरी समझ। ‘ठंडी कॉफी का स्वाद’ एक ऐसी भावनात्मक कहानी है, जो बताती है कि समय के साथ प्रेम, रिश्ते, सपने और उम्मीदें कैसे परिपक्व हो जाती हैं। यह कहानी सिखाती है कि हर रिश्ता बचाना ज़रूरी नहीं, हर दूरी हार नहीं होती और प्रेम किसी को बाँधने का नाम नहीं, बल्कि मुक्त करने का साहस भी है।

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