अब क्या होगा (अंतिम भाग)
यह कहानी प्रेम, नियति और विश्वास की ऐसी यात्रा है, जहाँ अतीत और वर्तमान टकराते नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझकर स्वीकार कर लेते हैं।

यह कहानी प्रेम, नियति और विश्वास की ऐसी यात्रा है, जहाँ अतीत और वर्तमान टकराते नहीं, बल्कि एक-दूसरे को समझकर स्वीकार कर लेते हैं।
एक संवेदनशील कहानी है जो पति-पत्नी के गहरे प्रेम, बीमारी की पीड़ा और बिछड़ने के मौन भय को हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत करती है।
बाई की वह मुद्रा कभी अचानक नहीं होती थी. पूरा महीना इंतज़ार करने के बाद, जब मैं पुणे से अपने घर लौटता, तो माँ हमारे पहले मकान के पहले कमरे में खिड़की खोलकर बैठी होती थी. कहने को तो वह दूध लेने वाले का इंतज़ार कर रही होती थी, पर असल में उसे मेरा ही इंतज़ार होता था. जैसे ही मैं दरवाज़े से भीतर कदम रखता, वह हल्की-सी मुस्कान के साथ एक ही नज़र में मेरा पूरा एक्स-रे कर लेती.. दुबला तो नहीं हुआ, काला तो नहीं हो गयाए बाल और स़फेद हुए या डाई नहीं की. कुछ भी उससे छुपा नहीं रहता था.
महिदपुर रोड के पुराने पीपल के पास रहने वाली मशहूर पारंपरिक दाई ‘ विमला भाभी’ का निधन हो गया. विमला भाभी स्वर्गीय मांगीलाल जी चौहान की धर्मपत्नी, कैलाशचंद्र चौहान, स्व.रमेशचंद्र चौहान की भाभीजी तथा लोकेंद्र, नरेंद्र, स्वर्गीय मनोज की माताजी तथा अंकित की दादी जी विमला बाई चौहान का निधन शनिवार शाम को हो गया.