
पूनम सिंह वत्सला, जमशेदपुर (झारखंड)
बसंत की बयार है तू,
प्रभु का वरदान है तू।
जब घर आता है तू,
घर बहारों से भर जाता है।
सब कुछ पीछे छोड़कर भागते हुए,
माँ के गले से लिपट जाता है।
तब मानो मेरे दिल में,
पलाश का फूल बन खिल जाता है तू।
तुझसे घर रोशन हो जाता है,
तेरे आने का पल सुकून दे जाता है।
हर दिन, हर पल कटता नहीं,
देहरी पर बैठी हूँ तेरे इंतज़ार में।
है तू मेरे जिगर का टुकड़ा,
तेरे जैसा नहीं कोई दूजा।
मेरे दिल की धड़कन है तू,
भविष्य का खेवनहार है तू।
तू है तो हम सब हैं,
ईश्वर की अनुकम्पा का फल है तू।
मेरे घर-आँगन का ताज है तू,
खुशियों के दीये-सा रोशन है तू।
तेरे दुलार के रंगों में रंगकर,
होली का गुलाल है तू।
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