अपने पुत्र को स्नेह और आशीर्वाद देती हुई भारतीय माँ का भावुक चित्र

कुलदीपक

“सुपुत्र” एक भावनात्मक हिंदी कविता है, जिसमें माँ अपने पुत्र को ईश्वर का वरदान, घर का उजियारा और अपने हृदय का अंश मानते हुए उसके प्रति अपना असीम प्रेम और आशीर्वाद व्यक्त करती है।

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कुसुम का धागा

सुबह की चाय का कप हाथ में लिए मैं अख़बार पढ़ रही थी कि एक खबर ने जैसे दिल को भीतर तक हिला दिया इंदौर में बस में छूटा नवजात शिशु, मां-बाप फरार.
खबर छोटी थी, पर असर बड़ा. कुछ पंक्तियों में लिखी उस घटना के पीछे जाने कितनी कहानियां दबी थीं. लिखा था. एक दंपत्ति बस में सवार हुए, गोद में एक नन्हा सा बच्चा था, मुश्किल से पंद्रह दिन का. थोड़ी देर बाद वे बोले कि कुछ सामान लेना है, बस से उतर गए.

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