माँ ही दिखेंगी रोज़ाना घर-आँगन में
माँ केवल घर में मौजूद एक रिश्ता नहीं, बल्कि घर-आँगन की हर स्मृति और हर दुआ में बसी एक भावना है। यह कविता माँ की ममता और अपनेपन को शब्द देती है।

माँ केवल घर में मौजूद एक रिश्ता नहीं, बल्कि घर-आँगन की हर स्मृति और हर दुआ में बसी एक भावना है। यह कविता माँ की ममता और अपनेपन को शब्द देती है।
सुबह की चाय का कप हाथ में लिए मैं अख़बार पढ़ रही थी कि एक खबर ने जैसे दिल को भीतर तक हिला दिया इंदौर में बस में छूटा नवजात शिशु, मां-बाप फरार.
खबर छोटी थी, पर असर बड़ा. कुछ पंक्तियों में लिखी उस घटना के पीछे जाने कितनी कहानियां दबी थीं. लिखा था. एक दंपत्ति बस में सवार हुए, गोद में एक नन्हा सा बच्चा था, मुश्किल से पंद्रह दिन का. थोड़ी देर बाद वे बोले कि कुछ सामान लेना है, बस से उतर गए.