
स्वरा सुरेखा, उत्तरप्रदेश
दोस्ती और रिश्तों में चुनाव की बात चलती है, तो मैं दोस्ती को चुनती हूँ।
वजह यह है कि यह रिश्ता हर रिश्ते से सर्वोच्च है, जिसमें कोई भेदभाव नहीं, कोई स्वार्थ नहीं और सबसे बड़ी बात, किसी तरह की औपचारिकता नहीं होती। लिंग, जाति, धर्म, ऊँच-नीच से कोसों दूर, एक शानदार, सुकून भरा साथ।
मैं ख़ुशनसीब हूँ कि मुझे अपनी ज़िंदगी में बेहतरीन दोस्त मिले। जब भी मैं हताश या उदास हुई, मेरे दोस्तों ने मुझे संभाला।
मेरी बीमारी के दौरान, जब मैं मौत से जंग लड़ रही थी, तब सघन चिकित्सा वार्ड के बाहर घंटों मेरे लिए दुआ माँगते दोस्तों को देखा है। जब मैं अवसाद में घिरी, तब मुझे घर से बाहर निकालकर सहज करते दोस्तों को देखा है। मेरे काव्य-पाठ में आगे आकर अपने गले से मेडल उतारकर मुझे पहनाते हुए, मेरी हौसला-अफ़ज़ाई करते ऐसे उत्कृष्ट दोस्तों को देखा है।
जब कभी ज़िंदगी को अंतिम मोड़ तक ले जाने की कोशिश रही, तब उन कोशिशों को नाकाम करके मेरी साँसों को लौटाती दोस्ती को जिया है।
निःस्वार्थ, निष्छल मन से हर बार 24×7, मैंने दोस्ती की एक ऐसी “फार्मेसी” को अपने लिए All Time Open पाया है।
नाम ज़ाहिर करके क्या करूँ?
मेरे लिए चुपचाप बेचैन होते दोस्तों को मैंने अपनी बेचैनी में महसूस किया है। मेरे चेहरे पर मुस्कान लाकर, मेरे लिए रोते दोस्तों को देखा है।
आज उम्र के जिस पड़ाव पर हूँ, वहाँ दोस्ती के हर ओहदे को देखा है। जी, ओहदे को… ताज्जुब लग रहा है न?
पर यह सच है। जहाँ एक सौंधी मिट्टी ने माँ की तरह गले लगाकर अपनी जड़ों को बचाना सिखाया, वहीं वह मेरे लिए नमित हो गई और मैं नमिता बनी।
बरखा ने अध्यात्म की वर्षा से भिगोकर उस नम मिट्टी को और हरा-भरा कर दिया, मैं सुरेख हुई।
वहीं माधवी ने आवाज़ बुलंद कर मुझे स्वरा बना दिया। प्रतिभा ने अपने कड़क अंदाज़ से मुझे मज़बूती दी। रागिनी ने परिपक्वता के राग सुरीले किए, तो शुचि ने मन को शुचिता देकर उसे पवित्र कर दिया। स्वधा ने बारीकी सिखाई, तो ज्योत्सना ने ज़िंदगी की ज्योत को बरकरार रखने की तालीम दी। कविता ने जीवन में मिठास घोली, वहीं सीमा ने हर बंधन के बीच भी बिंदास जीने की मर्यादा सिखाई। मंजु ने मनस्वी बनकर मन को मंदिर तक पहुँचा दिया। उपमा ने जीवन को उपवन बनाने की सशक्त ज़िम्मेदारी दी, तो संध्या ने सरस मार्गदर्शन दिया। गीता ने मुझे भगवद्गीता के श्लोकों से रूबरू कराया और दिदिया ने मेरे हर उस आकार को, जो आकारहीन हो चुका था, एक नया विस्तार दिया और सुरेखा स्वरा को विस्तृत आयाम प्रदान किया।
दोस्ती चार धाम की अर्चना है।
दोस्ती वृहद आसमान है।
दोस्ती एक ऐसा शब्दकोश है, जिसकी कोई सीमा नहीं।
बेशक, ज़िंदगी में माता-पिता के बाद दोस्ती ही एक ऐसा रिश्ता है, जो निःस्वार्थ और सबसे खूबसूरत होता है।
दोस्ती कोई रिश्ता नहीं, बल्कि ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत दौलत है।
जो दोस्त हर हाल में साथ खड़े रहें, वही सच्चे हमसफ़र कहलाते हैं।
हँसी हो या मुश्किलों का सफ़र, दोस्त साथ हों तो हर राह आसान लगती है।
ईश्वर करे, हर किसी को ऐसे सच्चे और नेक दोस्त मिलें।
धन्यवाद नहीं कहूँगी, क्योंकि यह शब्द बहुत छोटा और सूक्ष्म है। बस, ज़िंदगी उनके नाम, जो मेरे कमज़ोर समय में एक सशक्त संबल बनकर मेरे साथ खड़े रहे। मैं उनके प्रति नतमस्तक हूँ और हमेशा रहूँगी।
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उम्दा लिखती हो आओ,इसमें संशय नहीं पर इस सफर जिनको आपने अपने पास पाए,मैं भी उनमें शामिल हूं।बहुत खुशी हुई ये जानकर कि कोई मुझे भी अपना समझता है।
दीदी आप मेरे लिए बहुत खास है और आपने मेरा नाम का प्रयोग अपनी लेख में किया उसका उसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया
दोस्ती, ईश्वर की नियामत है और उसका शुक्राना अदा करना ईश्वर के दरबार में सिर झुकाना।
बहुत बहुत स्नेह।
सच्चे दोस्त वही होती है जो आवाज नहीं करते बस चुपके से पास आकर बैठ जाते हैं
धन्यवाद