बारिश में अपने अंडों को बचाती चिड़िया, मां के निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक

जब तूफान से लड़ी एक मां

मां का प्रेम निस्वार्थ और अटूट होता है। एक छोटी सी चिड़िया, जो तेज बारिश और तूफान में भी अपने अंडों की रक्षा के लिए अडिग खड़ी रही, हमें ममता का सच्चा अर्थ समझाती है। यह भावनात्मक अनुभव हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इंसानों में भी ऐसा ही निष्काम प्रेम मौजूद है।

Read More
शांत प्राकृतिक वातावरण में झील किनारे बैठी एक युवती, जो गहरे विचारों में डूबी हुई आत्म-चिंतन कर रही है

गहराइयों में छिपी सच्चाई

डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई जीवन की सच्चाई अक्सर सतह पर नहीं, उसकी गहराइयों में छिपी होती है। इसे समझने के लिए हमें कभी-कभी ठहरकर अपने भीतर झांकना पड़ता है। मेरे जीवन में भी एक ऐसा ही अनुभव आया, जिसने मुझे जीवन की गहराई से परिचित कराया। यह उन दिनों की बात है जब सब कुछ…

Read More
अपनी बेटी का हाथ थामे आत्मविश्वास से आगे बढ़ती माँ, नए शहर की पृष्ठभूमि में उगता सूरज

मुक्ति की उड़ान…

“मुक्ति की उड़ान” एक सशक्त कहानी है जो दर्शाती है कि जब एक माँ अपने आत्मसम्मान और बेटी के भविष्य के लिए खड़ी होती है, तो वह समाज की हर रूढ़ि को तोड़ सकती है। यह कहानी नारी साहस, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल है।

Read More
बेटी की सफलता और माँ के समर्थन को दर्शाती प्रेरणादायक लघुकथा का दृश्य

सौ सुनार की, एक लोहार की

सौ सुनार की, एक लोहार की!” एक प्रेरणादायक लघुकथा है, जिसमें एक माँ अपनी बेटी के सपनों के साथ खड़ी होती है और बेटी अपनी मेहनत से समाज की सोच को करारा जवाब देती है।

Read More

10 रुपये की कीमत

आज़ादी के बाद के दिनों में दो घनिष्ठ मित्र थे .एक धनी, एक साधारण।
एक दिन निर्धन मित्र ने 10 रुपये उधार लिए और फिर अचानक परिवार सहित कहीं चला गया।
25 साल बाद लखनऊ के एक होटल में दोनों अचानक मिले वही साधारण मित्र अब होटल मालिक बन चुका था।उसने कहा “मैं वो 10 रुपये वापस नहीं दूँगा, क्योंकि उन्हीं 10 रुपयों ने मुझे आज ये पहचान दी है।”

Read More

महिदपुर रोड की बहू बनी हाईकोर्ट एडवोकेट, चुनौतियों को हराकर लिखी सफलता की कहानी

महिदपुर रोड की खुशबू सिद्धार्थ कोचर ने साहस और मेहनत से हाईकोर्ट एडवोकेट बनने का सपना पूरा किया. उनकी यह कहानी महिलाओं के लिए प्रेरणा है.

Read More

मासूम सपने

अष्टमी के दिन गिन्नी और सक्षम को खेलने का मौका मिला। गिन्नी की विधवा माँ चाची की मदद में व्यस्त थीं, इसलिए बच्चों को थोड़ी आज़ादी मिली। सक्षम बड़े मासूम अंदाज़ में गिन्नी से पूछता है कि वह रोज उसके साथ क्यों नहीं खेलती। गिन्नी बताती है कि उसे पढ़ाई करनी है, क्योंकि माँ कहती हैं कि लड़कियाँ ज्यादा नहीं पढ़तीं, उन्हें घर के कामों के लिए तैयार रहना चाहिए।

सक्षम चाहता है कि वह भी अपने पापा को ढूँढे और घर वापस लाए, लेकिन गिन्नी उसे समझाती है कि ऊपर आकाश में सब लोग गुम हो जाते हैं। दोनों भाई-बहन अपने छोटे-छोटे सपनों और मासूम बातचीत में उलझे हुए हैं। चाची की चीखती आवाज उन्हें जगाती है, और गिन्नी की आँखों में चमकते सपने कुछ पल में बिखर जाते हैं। यह कहानी बच्चों की मासूमियत और उनके भीतर की संवेदनशीलता को दर्शाती है।

Read More
मुंबई में फिल्म राइटर के रूप में काम करती श्वेता बोथरा की प्रेरणादायक कहानी

शाबाश… श्वेता

उज्जैन के छोटे कस्बे महिदपुर रोड से आई श्वेता बोथरा ने हौसले, दृढ़ निश्चय और लगन से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई। महेश भट्ट और अनु मलिक के साथ डेब्यू कर उन्होंने साबित कर दिया कि असंभव कुछ भी नहीं। शिक्षा पूरी करने और मीडिया मैनेजमेंट में एमबीए के बाद श्वेता ने ओरकॉम एडवरटाइजिंग, इंदौर से करियर शुरू किया, लेकिन लेखन का जुनून उन्हें मुंबई ले गया।

उनकी लिखी फिल्म “तू मेरी पूरी कहानी” एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसे प्यार और करियर के बीच कठिन निर्णय लेना होता है। श्वेता की कहानी हज़ारों लड़कियों और युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा है—सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए हौसला, मेहनत और जुनून ही सबसे बड़ा हथियार हैं।

Read More

नीयत अच्छी हो तो मजहब दीवार नहीं बनता

वो दिन आज भी स्मृति में ताजे हैं, जब बिहार के छपरा शहर में हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़क उठे थे. चारों ओर डर का माहौल था, एक अनजानी आशंका हर घर के आंगन में सन्नाटा बनकर पसरी हुई थी. उन्हीं कठिन दिनों में, हमारे घर में एक गरीब मुस्लिम लड़का भी रहता था, जो गांव से पढ़ाई के लिए भेजा गया था.
उसे पापा के किसी पुराने मित्र ने यह कहकर भेजा था कि बेटा पढ़ाई में बहुत तेज़ है, लेकिन हालात ठीक नहीं हैं्. आपने बहुतों की मदद की है, आज इसे भी आपके सहारे की ज़रूरत है.

Read More

इंदौरियत जिंदा है…..

इंदौर ने स्वच्छता में लगातार आठवीं बार पहला स्थान पाकर यह सिद्ध कर दिया है कि जब नागरिक जागरूक हो जाएं तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं। जहां देश के कई शहरों में सफाईकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं इंदौर में उन्हें हार पहनाकर सम्मानित किया जा रहा है। यह सिर्फ स्वच्छता की जीत नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता की जीत है। इंदौर ने साबित किया है कि शहर की खूबसूरती केवल सड़कें नहीं, बल्कि वहां के लोगों का दिल भी होता है।

Tags:

Read More