उम्मीद

छोटा बच्चा अपनी गुल्लक देकर जरूरतमंद की मदद करता हुआ, प्रेरणादायक हिंदी कहानी

अर्पणा सिंह “अर्पी”, रांची

रोहित पाँच साल का शरारती, नटखट और समझदार बच्चा था। जब भी कोई घर पर आता, जाते समय उसे कुछ पैसे देता, जिन्हें वह अपने गुल्लक में डाल देता था। उसकी माँ ने बचपन से ही उसे बचत करना सिखा दिया था।

सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, तभी कोरोना आ गया और सबकी ज़िंदगी मानो ठहर गई। काम-काज बंद हो गया और हालात बदतर हो गए। जीवन चारदीवारी के भीतर सिमटकर रह गया था।

एक दिन रोहित की शिक्षिका ने बताया कि इस संकट की घड़ी में हमें एक-दूसरे का ध्यान रखना चाहिए और यदि कोई जरूरतमंद हो, तो उसकी सहायता अवश्य करनी चाहिए। रोहित ने इस बात को दिल से लगा लिया।

एक सुबह जब वह जागा, तो उसे पता चला कि उसके पड़ोस में रहने वाले राहुल की तबीयत बहुत खराब हो गई है। उसके माता-पिता बेहद परेशान थे, क्योंकि उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे।यह सुनते ही रोहित तुरंत घर के अंदर गया और अपना गुल्लक लेकर आया। उसने वह गुल्लक राहुल के पिता को देते हुए कहा, “आप इन पैसों से राहुल का इलाज करवा दीजिए।”उसकी बात सुनकर वहाँ मौजूद सभी लोगों की आँखें नम हो गईं, क्योंकि ये वही पैसे थे जिन्हें रोहित अपनी साइकिल खरीदने के लिए जमा कर रहा था।
उसकी इस छोटी-सी पहल से राहुल के परिवार की आँखों में उम्मीद की एक नई चमक आ गई। इस प्रकार एक छोटे बच्चे की संवेदनशील सोच ने एक बड़ी परेशानी को हल कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *