खिड़की पर तिनके लिए बैठी एक नन्ही गौरैया, जो आशा और जीवन की ऊर्जा का प्रतीक दिखाई दे रही है।

गौरैया

खिड़की पर आकर चहकती गौरैया केवल एक पक्षी नहीं लगती, बल्कि जीवन की जिद और आशा का जीवंत रूप प्रतीत होती है। नन्ही चोंच में तिनके दबाए वह जैसे हर बार याद दिलाती है कि टूटे हुए घोंसले भी फिर से बसाए जा सकते हैं। उसकी चपल उड़ान और निरंतर प्रयास उस मन से संवाद करते हैं, जो उदासी और पीड़ा के बोझ तले थक चुका है। यह कविता गौरैया के माध्यम से जीवन, आशा और भीतर फिर से घर बनाने की इच्छा को संवेदनशीलता से अभिव्यक्त करती है।

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आईने के सामने खड़ी एक महिला, जो अपने भीतर के विभिन्न भावों को महसूस कर रही है

मैं मुझमें, मुझमें मैं

“मैं ही उजाला, मैं ही अँधेरा हूँ, मैं ही ख़ुशी, मैं ही दुःख हूँ…”जब इंसान खुद को पूरी तरह स्वीकार कर लेता है,तो उसे किसी और की ज़रूरत नहीं रह जाती. वह खुद में ही एक पूरी दुनिया बन जाता है।

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छोटा बच्चा अपनी गुल्लक देकर जरूरतमंद की मदद करता हुआ, प्रेरणादायक हिंदी कहानी

उम्मीद

यह सुनते ही रोहित तुरंत घर के अंदर गया और अपना गुल्लक लेकर आया।उसने वह गुल्लक राहुल के पिता को देते हुए कहा,‘आप इन पैसों से राहुल का इलाज करवा दीजिए।’
यह वही पैसे थे, जिन्हें वह अपनी साइकिल खरीदने के लिए जमा कर रहा था.लेकिन उस दिन उसकी छोटी-सी सोच ने किसी के घर में बड़ी उम्मीद जगा दी।”

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मोहब्बत में हार, जीवन में जीत…

अनंत, शहर में बड़े सपनों के साथ आया था, लेकिन पहली मोहब्बत ने उसे टूटने के कगार पर ला खड़ा किया। दृष्टि का धोखा, टूटे दिल और निराशा में वह समुद्र की ओर बढ़ा। तभी मां की आवाज़ ने उसे रोक दिया। मां की ममता और हौसले ने अनंत को जगाया, और उसने अपने सपनों और जिंदगी को फिर से गले लगाया। अब दर्द से सीख लेकर वह सफलता की ओर कदम बढ़ा रहा है।

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ज़िंदगी आखिर कट ही जाएगी

ज़िंदगी अंत में कट ही जाती है चाहे हम मोहब्बत में डूबे हों या किसी की नफ़रत से लड़ रहे हों। कभी दर्द के साये में गुज़रती है, तो कभी हँसी की छोटी-सी किरण उसे रोशन कर देती है।
जीवन की यही सच्चाई है: दो पल का सफ़र, जो हाथ से फिसलते हुए भी हमें कुछ सिखा जाता है। खुशियाँ छोटी हों या बड़ी, बाँट देने से ही दिल हल्का होता है। ग़मों को अंदर दबाकर रखने से वे बोझ बन जाते हैं लेकिन किसी अपने के साथ उन्हें साझा कर लिया जाए तो वही दर्द ताकत में बदल जाता है।

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चाहत

कई वर्षों तक जिम्मेदारियों के बोझ तले दबी मेरी पढ़ाई की इच्छा आज फिर से सिर उठाने लगी है। उम्र पचास पार कर चुकी है, पर मन में अभी भी उम्मीद की लौ जल रही है। कभी मेधावी छात्रा रही मैं, जीवन की उलझनों में खुद को कहीं खो बैठी थी। कर्तव्य और परिवार ने हमेशा पहला स्थान पाया, और मेरी इच्छाएँ पीछे छूटती गईं।

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प्रेम और नफ़रत

प्रेम वह शक्ति है जो जीवन को जोड़ती है और नफ़रत वह आग है जो उसे भस्म कर देती है। जहाँ प्रेम होता है, वहाँ मुस्कान होती है; जहाँ नफ़रत होती है, वहाँ विनाश। इसलिए प्रेम बाँटिए, नफ़रत छोड़िए क्योंकि प्रेम ही सच्ची मानवता है।

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हमको सूरज है बनना

“हमको सूरज है बनना—चाहे जलना पड़े। अंधकार दूर भगाना, पाप मिटाना और जीवन में प्रकाश फैलाना ही हमारा प्रण है। यह कविता साहस, एकता और सेवा की प्रेरणा देती है।”

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सच में वही दीपावली होगी

ज्योति सोनी “वैदेही ” अलवर ,राजस्थान दीपावली, अंधेरे रूपी शत्रु के विरोध में सैकड़ों दियों की क्रांति का त्यौहार है। किस तरह नन्हे-नन्हे दिए, अपने साहस को समेटकर पूरी शक्ति और हिम्मत से उस अंधेरे को चीरते हुए धीरे-धीरे जलते हैं, जिसने उन्हें चारों ओर से घेर रखा है। उस कमजोर सी बाती में कितनी…

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