मोहब्बत में हार, जीवन में जीत…

सुरेश परिहार, पुणे

अनंत—गांव का साधारण-सा 22-23 साल का लड़का। सपनों से भरा बैग लेकर शहर आया था। सोच रखा था कि पढ़ाई पूरी करेगा, कॉल सेंटर की नौकरी से पैसे जोड़कर MBA करेगा और एक दिन कुछ बड़ा बनेगा। आंखों में उम्मीद, दिल में हौसला… और जिंदगी आगे बढ़ रही थी।

दफ्तर के पास एक छोटा-सा कैफे था। अनंत रोज़ वहीं चाय पीने जाता। उसी समय अक्सर एक लड़की भी वहां आती दृष्टि। पहली नज़र में ही अनंत का दिल धड़क उठा, पर दृष्टि मुस्कुरा कर कहती.
“भैया, एक चाय मेरे लिए भी!”
अनंत मुस्कुरा देता, पर मन में हल्की टीस उठती.वह ‘भैया’ कहलाना नहीं चाहता था।

धीरे-धीरे पहचान दोस्ती में बदली। बातचीत, चाय की चुस्कियाँ, फिर नंबर, चैट्स और कॉलें… कई हफ्तों बाद एक शाम दृष्टि ने कहा-
“देखो अनंत, मैं तुम्हें सबके सामने भैया ही कहूँगी। लोग बातें न बनाएं… समझा करो।”
अनंत ने मन दबा लिया। प्यार तो उसे हो चुका था।
कुछ महीनों बाद दोनों ने एक-दूसरे से इज़हार कर लिया। अनंत खुशी से भर गया। सपने बदल गए.MBA के लिए जमा किए पैसे अब दृष्टि के महंगे गिफ्ट्स और आउटिंग में खर्च होने लगे।

वह दीवाना हो चुका था।
सपने नहीं.अब दृष्टि ही उसकी दुनिया थी।

एक साल बीतते-बीतते बहुत कुछ बदल गया। दृष्टि के कॉल कम होने लगे, संदेशों के जवाब देर से आने लगे।
“कहाँ हो?”
“बिजी हूँ अनंत… काम बहुत है।”

अनंत समझ नहीं पा रहा था कि क्या गलत हो रहा है। एक दिन उसकी तबीयत बिगड़ी, दोस्त उसे अस्पताल ले गए। उसे सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी दृष्टि की। उसने कॉल किया, मैसेज किया.लेकिन कोई जवाब नहीं।

अस्पताल से लौटते वक्त वह दृष्टि को अचानक किसी और लड़के के साथ कार में देख बैठा। दिल जैसे वहीं थम गया। वह चुप रहा, कुछ कहा नहीं।

शाम को दृष्टि मिलने आई।
अनंत ने पूछा-
“सारा दिन बुखार में था… तुमने एक बार भी फोन नहीं किया?”
दृष्टि सहज आवाज़ में बोली-
“आज मीटिंग्स में फँसी थी… बॉस ने पागल कर रखा है। ऑफिस से एक मिनट भी बाहर नहीं निकल पाई।”
अनंत बस उसे देखता रहा। आंखों में दर्द, पर होंठों पर चुप्पी।
उसने चाय बनाने को कहा और दृष्टि के रसोई में जाते ही उसका फोन उठा लिया।

स्क्रीन पर नाम चमक रहा था Daksh
चैट खुली… दिल टूटने की आवाज़ अनंत ने अपने भीतर सुनी।

“आज रात मिलना है न?”
“हाँ बेबी, इंतज़ार नहीं होता।”

अंगुलियाँ कांप गईं। सांस भारी हो गई।
उसने फोन वापस रख दिया। दृष्टि बाहर आई, मोबाइल देखा और तुरंत जाने का बहाना बनाया—
“लेट हो रहा है… मुझे घर जाना है।”

अनंत चुपचाप उसके पीछे-पीछे चल पड़ा। दृष्टि ने स्कूटी पार्क की और उसी कार में बैठ गई। कार सीधा एक होटल के बाहर रुकी। अनंत का धड़कता दिल अब बिखर चुका था, लेकिन अंतिम जवाब पाना ज़रूरी था।

उसने कॉल किया
“पीछे देखो, दृष्टि।”

दृष्टि चौंक गई। रंग उड़ गया चेहरे का।
जल्दी से बाहर आई
“अनंत… वो… सुनो…”
“कितना सुनूँ? कब तक? बस एक बात क्यों?”

बहुत देर बहस चली। आखिरकार दृष्टि चिल्लाई
“हाँ! अब मुझे तुममें इंटरेस्ट नहीं। ब्रेकअप कर रही हूँ। समझो। आगे बढ़ो!”

अनंत वहीं खड़ा रह गया।
ज़मीन पैरों के नीचे से जैसे खिसक गई।
दृष्टि चली गई। नंबर ब्लॉक… हर रास्ता बंद।

अनंत टूट गया। जिस प्यार में उसने सपने, करियर, सालों की मेहनत लगा दी.वह किसी के लिए बस खेल था।
रातों तक रोता रहा। भूख-प्यास गायब।
माँ-बाप, गांव, सपना… सब धुंधला होने लगा।

अनंत अपने अंदर उमड़ते तूफान से हार मान, समुद्र की तरफ बढ़ने लगा…… तेज हवाएं चल रही थी, अनंत के अंदर का शोर इतना ज्यादा था, कि उसे बाहर का शोर सुनाई नहीं दे रहा था । सुस्त कदमों से अपनी मंजिल की तरह बढ़ रहा था, तभी एक कोने से किसी के सिसकियों की आवाज सुनाई दी….. ना चाहते हुए भी अनंत के कदम ठिठक गये ….. उस ओर मुड़कर देखा तो …… एक औरत, और एक लगभग 15 -16 साल की लड़की , दोनों गले लगकर जोर-जोर से रो रही थीं। शायद दोनों मां बेटी थी। ‌ मां – बेटी से कह रही थी….. तू क्या सोच कर मरने जा रही थी….. मेरा प्यार उस लड़के के प्यार से छोटा हो गया…… उसने तुझे धोखा दिया, और तू मुझे …..धोखा देने चली थी । एक बार भी नहीं सोचा – तेरी मां तेरे बिना कैसे जीएगी ,…. जिंदगी से बड़ा और कुछ नहीं होता । हिम्मत मत हार ,मेरी बच्ची – मैं हमेशा तेरे साथ हूं हम दोनों मिलकर तेरे सपने सच करेंगे ।

उनकी सारी बातें सुनकर अनंत जैसे नींद से जागा……….. वहीं गीली रेत पर
बैठ गया…. आंखों से पश्चाताप बहने लगा….. अपने आप से बात करता हुआ बोला –
” नहीं मां ! मैं तुम्हें धोखा नहीं
दूंगा ” अब मैं हमारे सपने पूरे करके रहूंगा । दृष्टि ने, मुझे एक नई ” दृष्टि” दी है ….
किसी और के गुनाह की सजा में खुद को क्यों देने जा रहा था ? क्या एक लड़की के चंद दिनों का झूठा प्यार, मां के प्यार से बड़ा हो सकता है? जो दौलत मैंने दृष्टि के उपर लुटाई, क्या मैं उसे वापस नहीं कमा सकता ? बदले में मिला सबक, उन रूपयों से कहीं अधिक कीमती है । मौत नहीं अब जिंदगी को गले लगाना चाहता हूं …….
अनंत अब वापस घर की तरफ लौट चला, सफलता की चाबी शायद अब उसकी मुट्ठी में थी ।

One thought on “मोहब्बत में हार, जीवन में जीत…

  1. आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता। बच्चों को कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले एक बार अपने जन्म देने वाली मां के बारे में सोच लेना चाहिए ।‌प्रेरणादायक कहानी।

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