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त्र्यंबकेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर ठगी

त्र्यंबकेश्वर मंदिर

ट्रस्टी समेत दो गिरफ्तार, भक्तों से 2 से 6 हजार रुपये तक वसूले,

नाशिक. महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं के बाद अब त्र्यंबकेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से ठगी का मामला सामने आया है. मंदिर ट्रस्ट के एक ट्रस्टी ने अपने भतीजों के माध्यम से भाविकों से हजारों रुपये वसूलने का खेल चला रखा था. पुलिस ने इस मामले में ट्रस्टी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि मात्र आधे घंटे में चार श्रद्धालुओं से 9 हजार रुपये की ठगी की गई.

गिरफ्तार आरोपियों के नाम पुरुषोत्तम मधुकर कडलग (उम्र 46, निवासी कडलग गली, त्र्यंबकेश्वर, जिला नाशिक) और गोटीराम मनाजी पेहरे (उम्र 41, निवासी खडकवाडी, त्र्यंबकेश्वर) हैं. ट्रस्टी के भतीजे अभिषेक कडलग और ओम कडलग के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है.इस मामले में आनंदा सुरेश मेहंदळे (उम्र 46, निवासी पारस सोसायटी, टकलेनगर, पंचवटी, नाशिक) ने त्र्यंबकेश्वर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है.

शिकायत के अनुसार, 11 अप्रैल की रात करीब साढ़े 11 बजे वे अपने मित्र के साथ 200 रुपये के अधिकृत दर्शन पास लेकर कतार में खड़े थे. इसी दौरान गोटीराम पेहरे उनके पास आया और 10 मिनट में वीआईपी दर्शन कराने का लालच दिया. उसने कहा कि सामान्य कतार में 4 से 5 घंटे लगेंगे, जबकि 3 हजार रुपये में तुरंत दर्शन करा सकता है. इसके बाद ट्रस्टी पुरुषोत्तम कडलग की मदद से उन्हें मंदिर में अंदर प्रवेश दिलाकर दर्शन कराए गए और बाहर आने पर 3 हजार रुपये वसूले गए. कोई रसीद भी नहीं दी गई.

जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ एजेंट कतार में खड़े श्रद्धालुओं से संपर्क कर तेज दर्शन का लालच देते थे. ये एजेंट ट्रस्टी के भतीजों से संपर्क कर श्रद्धालुओं को उनके साथ भेजते थे. इसके बाद ट्रस्टी के माध्यम से दर्शन कराकर श्रद्धालुओं से 2 हजार से 5 हजार रुपये तक वसूले जाते थे.

पुणे के एक श्रद्धालु दिनेश दीपक चालके (उम्र 40, निवासी विमाननगर) से भी इसी तरह 6 हजार रुपये वसूले गए. इस दौरान फर्जी नाम से एंट्री रजिस्टर में दर्ज किया गया, जो जांच में गलत पाया गया. मंदिर के सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है.पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले का मुख्य सूत्रधार ट्रस्टी पुरुषोत्तम कडलग है और इसमें अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है. इस तरह की गतिविधियों से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और लंबे समय तक लाइन में खड़े रहने वाले भक्तों के साथ अन्याय हो रहा है. अदालत में सहायक सरकारी वकील ने आरोपियों की पुलिस हिरासत की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने आरोपियों को 20 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

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