
रेणु वर्मा, जोधपुर
बाद तेरे कभी किसी को भी
अहमियत दी न ज़िंदगी को भी
वो अकेला कभी नहीं आता
साथ लाता है रोशनी को भी
जब क़सीदे लिखें समंदर के
याद रखिएगा तब नदी को भी
रब ने महफ़ूज़ कर दिया इक नाम
प्यार के साथ, बंदगी को भी
मार्च-अप्रैल भी अब के ऐसे हैं
फूल तरसे हैं इक हँसी को भी
लेखिका के बारे में-
रेणु वर्मा
शब्दों को केवल लिखना नहीं, उन्हें महसूस करना और जीवन के अनुभवों से जोड़कर पाठकों तक पहुँचाना रेणु वर्मा की रचनात्मक पहचान है. शिक्षा, साहित्य और प्रसारण तीनों क्षेत्रों में सक्रिय रेणु वर्मा वर्तमान में राजस्थान शिक्षा विभाग में अंग्रेज़ी की प्राध्यापक हैं. आकाशवाणी जोधपुर से कैज़ुअल कंपियर के रूप में जुड़ी रहीं और 1996 में आकाशवाणी नागौर से महिलाओं एवं बच्चों के कार्यक्रम के प्रसारण का अनुभव भी उनके रचनात्मक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा है. हिंदी और उर्दू में ग़ज़ल, नज़्म, कविता और दोहे उनकी प्रमुख रचनात्मक विधाएँ हैं. उनकी रचनाओं में प्रेम और संवेदना के साथ जीवन की सकारात्मक दृष्टि, सामाजिक सरोकार और मानवीय रिश्तों की गर्माहट दिखाई देती है. उनकी ग़ज़लों को जोधपुर, जयपुर, श्रीगंगानगर, पंजाब और अहमदाबाद के गायकों ने अपनी आवाज़ दी है.उनका ग़ज़ल संग्रह ‘कैफ़ियत’ वर्ष 2018 में प्रकाशित हुआ, जबकि इसी नाम से उनका ऑडियो एल्बम 2017 में आया. उनकी रचनाएँ रेख़्ता पर ई-बुक के रूप में उपलब्ध हैं तथा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में हिंदी और अंग्रेज़ी में स्तंभ, कविता और ग़ज़ल के रूप में प्रकाशित होती रही हैं. वर्ष 2021 में रेख़्ता के यूट्यूब चैनल के लिए उनकी दस ग़ज़लें रिकॉर्ड की गईं. साहित्यिक गतिविधियों में उनकी निरंतर भागीदारी उन्हें एक सक्रिय रचनाकार के रूप में स्थापित करती है. रेख़्ता, PLF मुंबई, स्वर धरोहर जयपुर, इश्क़ जुलाहे गुरुग्राम, पाथेय शोध संस्थान उदयपुर तथा जयपुर दूरदर्शन के विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी सहभागिता रही है. वे ‘रूबरू’ त्रैमासिक पत्रिका के जोधपुर रीजन की को-एडिटर भी हैं. ‘रोशनाई’ और ‘हमख़याल’ जैसे साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से उन्होंने शायरी की दुनिया को मंच देने की पहल भी की है.
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