खिड़की के पास बैठी एक युवती, शहर की रोशनी को देखते हुए गहरी सोच में डूबी है, हाथ में फोन है लेकिन वह किसी को संदेश नहीं भेज रही, चेहरे पर हल्की उदासी और अनकही मोहब्बत का एहसास झलक रहा है।

खामोशी में छुपा प्यार

कभी-कभी प्यार शब्दों में नहीं, खामोशी में पनपता है। यह वही एहसास है जो दिल में चुपचाप जगह बना लेता है, बिना इज़हार के भी गहराता जाता है। इस अनकही मोहब्बत में एक सुकून भी है और एक हल्की सी कसक भी, जहां हर खामोशी के पीछे सिर्फ एक ही नाम छुपा होता है।

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“खिड़की के पास बैठी भावुक महिला”

मेरी ख़ामोशियाँ पढ़ लो तुम

“मेरी ख़ामोशियाँ पढ़ लो तुम” एक बेहद भावनात्मक हिंदी कविता है, जो अनकहे जज़्बातों और रूहानी प्रेम की गहराई को खूबसूरती से व्यक्त करती है। यह कविता उन भावनाओं की कहानी है, जिन्हें शब्दों में कहना मुश्किल होता है, लेकिन दिल उन्हें गहराई से महसूस करता है।

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जब से तुमसे नयन मिले

महक

जब से हमारी नज़रें मिली हैं, दिल की दुनिया बदल सी गई है. इच्छाओं को जैसे नए पंख मिल गए हैं और हर ख्वाहिश अब तुम्हारी ओर ही उड़ती है. दिल की बातें दिल तक पहुंचने को तरस रही हैं, लेकिन सावन की बरसात हमारे मिलने में दूरी बनकर खड़ी है. हर बूंद में एक अजीब सी आग है, जो तुम्हारी याद और लगन को और गहरा कर देती है. मन में बस एक ही चाह है तुमसे मिलना, तुम्हारे करीब आना, और इस प्रेम को हर पल जीना.

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सूर्यास्त की हल्की सुनहरी रोशनी में खड़ा एक युवा दर्पण में मुस्कुराते हुए स्वयं को निहारता हुआ, प्रेम और आत्मविश्वास का प्रतीक

इश्क कीजिए

“इश्क कीजिए” एक कोमल और संवेदनशील हिंदी कविता है, जो दिल की उदासी, यादों की दस्तक और अनायास जन्म लेने वाले प्रेम के एहसास को शब्द देती है। यह कविता बताती है कि इश्क केवल किसी और से नहीं, बल्कि खुद पर विश्वास रखने का भी नाम है।

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इश्क़ का कारोबार

यह रचना प्रेम, प्रतीक्षा और विरह की गहन अनुभूति को शब्द देती है। दिल में सहेजे प्यार, अख़बार में कैद ख़बरें और आँसुओं से लिखे ख़त ये पंक्तियाँ उस आशिक़ की कथा कहती हैं जो यादों, तन्हाई और ज़ख़्मों के बीच भी इश्क़ को पूरी शिद्दत से संभाले बैठा है।

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खिड़की के पास बैठा एक अकेला व्यक्ति, हाथ में ख़त लिए, जो इंतज़ार और अधूरे इश्क़ को दर्शाता है

ख़ामोशी के पते

कुछ पतों के पते कभी मिलते नहीं, और कुछ खतों के जवाब लौटकर नहीं आते। ये कविता अधूरी मोहब्बत, अनकहे जज़्बात और खामोश इंतज़ार की एक सजीव तस्वीर पेश करती है—जहाँ भावनाएं शब्दों से कहीं ज़्यादा कह जाती हैं।

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“आसान हो जाए सफ़र”

मेरी क़िस्मत में तेरा साथ अगर हो जाएज़िंदग़ी का मेरा आसान सफ़र हो जाएऔर कुछ भी नहीं ख़्वाहिश मेरी अब इसके सिवामेरे महबूब की बस मुझ पे नज़र हो जाए.

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