
हिमांशु शुक्ल, ग्रेटर नोएडा
जमीं के सितारों की हुंकार, सुन लो
ये टूटे बहुत फिर भी खुद्दार, सुन लो
ये माना कि मुश्किल फ़लक तक है जाना,
हैं सूरज से लड़ने को तैयार, सुन लो
न मेरी सगी है न तेरी सगी है,
ये ग़ज़लों की दुनिया भी व्यापार, सुन लो
हैं मंचों के ख़ातिर सियासत की चालें
कलम मेरे हाथों में तलवार, सुन लो
जिसे देखो ग़ज़लें सिखाने लगा है
ये दिल-फेंक आशिक़ हैं बीमार, सुन लो
ज़रूरी नहीं है मोहब्बत में ग़म हो
ग़मों में मोहब्बत भी त्यौहार, सुन लो
न ऊला न सानी न मक़्ता न नुक़्ता
ग़ज़ल बहर बिन कर के स्वीकार, सुन लो !!
