Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
मंच पर ग़ज़ल पढ़ता एक शायर, पीछे चमकते सितारे और गंभीर साहित्यिक माहौल का दृश्य।

ग़ज़ल

कलम जब तलवार बन जाए, तब ग़ज़ल सिर्फ़ इश्क़ नहीं करती… सच भी कहती है।यह ग़ज़ल खुद्दारी, संघर्ष, साहित्य की सियासत और मोहब्बत के बदलते मायनों पर तीखा लेकिन संवेदनशील प्रहार करती है।”

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