
नमिता सिन्हा, बेंगलुरु
सोना, डीज़ल, गैस और पेट्रोल बचाएंगे,
कार-स्कूटी जैसे वाहन भी कम चलाएंगे।
विपदा आई है पावन भूमि पर हमारे,
आओ फिर हम डटकर साथ निभाएंगे।
बर्फीले पहाड़, समंदर और थार भारत में,
फिर विदेश भला हम क्यों घूमने जाएंगे।
दफ्तर का काम भी अब घर से ही निपटाएंगे,
बचत समय संग तेल की एक साथ कराएंगे
संकट की इस रजनी को मिलकर हम हराएंगे,
भारत के सम्मान का सूरज सबसे उपर लाएंगे|
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मौजूदा हालात पर बेहतरीन टिप्पणी बेहद सटीक चित्रण 👌👌👏👏