मैं पापा की नन्ही परी" एक भावुक हिंदी कविता है, जिसमें शहीद सैनिक की बेटी अपने पिता के बिछड़ने का दर्द, माँ की पीड़ा और अपने अनकहे भावों को मार्मिक शब्दों में व्यक्त करती है।

मैं पापा की नन्ही परी

एक शहीद सैनिक की बेटी की दृष्टि से लिखी गई यह हृदयस्पर्शी कविता पिता के बलिदान, माँ के दुःख और एक बेटी के अधूरे स्नेह की कहानी कहती है। “मैं पापा की नन्ही परी” पाठकों की संवेदनाओं को गहराई से छू लेने वाली रचना है।

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भारतीय तिरंगे के साथ खड़ा एक जागरूक युवा, पीछे सोलर ऊर्जा, भारतीय पहाड़, रेगिस्तान और शहर का दृश्य।

देश संग खड़े रहो

“जब देश कठिन दौर से गुजरता है, तब छोटी-छोटी बचत भी बड़ा योगदान बन जाती है।
यह कविता एकजुटता, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की प्रेरक आवाज़ है।”

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विदेश में खड़ी एक भारतीय महिला अपने वतन को याद करते हुए भावुक दिखाई दे रही है

विदेश में वतन की याद

विदेश की ठंडी हवाओं में भी दिल अपने वतन की खुशबू खोजता रहता है। यह कविता परदेस में रहकर भारत और अपनों की यादों को महसूस करने वाले हर भारतीय की भावनाओं को शब्द देती है।

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भारतीय सैनिक की वर्दी में खड़ा जवान, पृष्ठभूमि में तिरंगा और भावनात्मक माहौल

सैनिक का अंतर्मन

यह कविता एक सैनिक के अंतर्मन की उन गहराइयों को उजागर करती है, जहाँ कर्तव्य और भावनाएँ एक साथ सांस लेती हैं। वह अपने परिवारपत्नी, बहन, पिता और माँसे दूर होते हुए भी उनसे गहराई से जुड़ा रहता है, लेकिन देश के प्रति अपने वचन को सर्वोपरि रखता है। उसके भीतर का प्रेम त्याग में बदल जाता है, और उसकी हर विदाई एक अनकही पीड़ा के साथ-साथ गर्व का संदेश भी छोड़ जाती है। यह रचना बताती है कि एक सैनिक केवल सरहदों की रक्षा नहीं करता, बल्कि अपने दिल के सबसे करीब रिश्तों को पीछे छोड़कर पूरे देश को अपना परिवार मान लेता है।

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उज्जैन में वंदे मातरम् कार्यक्रम में मंच पर विनय पत्राले और अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ भारत भारती और सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के सदस्य

वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है : विनय पत्राले

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में श्री विनय पत्राले ने कहा कि वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है। कार्यक्रम में सरदार पटेल के योगदान, राष्ट्रगीत और देशभक्ति पर विचार साझा किए गए।

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मातृभूमि प्रेम और ग्रामीण जीवन की यादों को दर्शाती भावपूर्ण हिंदी कविता का प्रतीकात्मक दृश्य

मातृभूमि…

यह कविता मातृभूमि के प्रति गहरे प्रेम और यादों को उजागर करती है। गाँव की मिट्टी, धान की वलियाँ, ओस भरी जमीं और कठिनाइयों के बावजूद मातृभूमि से जुड़ाव को भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करती है।

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ख़त : सैनिकों के नाम

सीमाओं पर खड़ा सैनिक सिर्फ़ बंदूक नहीं थामे होता, वह अपने घर, अपने बच्चों की हँसी और माता-पिता की आँखों की प्रतीक्षा भी वहीं छोड़ आता है। सर्दी, गर्मी और बरसात उसके लिए मौसम नहीं, कर्तव्य की परीक्षा होते हैं। देश की शान उसके कदमों में और भारत की नींद उसकी आँखों की जाग में सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि हर दुआ, हर नमन और हर उम्मीद सबसे पहले उसी के नाम लिखी जाती है।

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हरियाणा का गौरव गान

अंजू शर्मा ‘वशिष्ठ’ करनाल, हरियाणा हरियाणा है वीरों की धरती, शौर्य जहाँ की शान,रक्त में बसा पराक्रम, माथे पर अभिमान।मिट्टी यहाँ की महके वीरों के बलिदान से,हर दिल में गूँजे स्वर भारत माँ के गान से। पंडित लख्मीचंद की रागनी गूँजे, बनकर लोक कथाएं,नेकीराम शर्मा की वाणी, सच्चा पाठ सिखाए ।ऐसे वीरों की धरती ये,…

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हिंदी में हँसी, हिंदी में प्यार

आज हिंदी दिवस पर सबको याद दिलाएँ – अंग्रेज़ी नहीं, अपनी प्यारी हिंदी बोलें! बात करें, हँसी-मज़ाक करें और इसे दिल से अपनाएँ। क्योंकि हिंदी है हमारी भाषा, हमारी पहचान।”

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