हमने देश को क्या दिया ?
देश ने हमें आजादी, स्वाभिमान और विकास का अवसर दिया. लेकिन क्या हमने अपने देश को उतना ही लौटाया? स्वतंत्रता दिवस पर नागरिक जिम्मेदारी, स्वच्छता और सच्ची देशभक्ति पर आत्ममंथन करता यह लेख.

देश ने हमें आजादी, स्वाभिमान और विकास का अवसर दिया. लेकिन क्या हमने अपने देश को उतना ही लौटाया? स्वतंत्रता दिवस पर नागरिक जिम्मेदारी, स्वच्छता और सच्ची देशभक्ति पर आत्ममंथन करता यह लेख.
एक शहीद सैनिक की बेटी की दृष्टि से लिखी गई यह हृदयस्पर्शी कविता पिता के बलिदान, माँ के दुःख और एक बेटी के अधूरे स्नेह की कहानी कहती है। “मैं पापा की नन्ही परी” पाठकों की संवेदनाओं को गहराई से छू लेने वाली रचना है।
“जब देश कठिन दौर से गुजरता है, तब छोटी-छोटी बचत भी बड़ा योगदान बन जाती है।
यह कविता एकजुटता, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की प्रेरक आवाज़ है।”
विदेश की ठंडी हवाओं में भी दिल अपने वतन की खुशबू खोजता रहता है। यह कविता परदेस में रहकर भारत और अपनों की यादों को महसूस करने वाले हर भारतीय की भावनाओं को शब्द देती है।
यह कविता एक सैनिक के अंतर्मन की उन गहराइयों को उजागर करती है, जहाँ कर्तव्य और भावनाएँ एक साथ सांस लेती हैं। वह अपने परिवारपत्नी, बहन, पिता और माँसे दूर होते हुए भी उनसे गहराई से जुड़ा रहता है, लेकिन देश के प्रति अपने वचन को सर्वोपरि रखता है। उसके भीतर का प्रेम त्याग में बदल जाता है, और उसकी हर विदाई एक अनकही पीड़ा के साथ-साथ गर्व का संदेश भी छोड़ जाती है। यह रचना बताती है कि एक सैनिक केवल सरहदों की रक्षा नहीं करता, बल्कि अपने दिल के सबसे करीब रिश्तों को पीछे छोड़कर पूरे देश को अपना परिवार मान लेता है।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम में श्री विनय पत्राले ने कहा कि वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है। कार्यक्रम में सरदार पटेल के योगदान, राष्ट्रगीत और देशभक्ति पर विचार साझा किए गए।
यह कविता तिरंगे के सम्मान, शहीदों के बलिदान और एकता के संकल्प के साथ नए भारत के निर्माण की प्रेरक अभिव्यक्ति है।
सीमाओं पर खड़ा सैनिक सिर्फ़ बंदूक नहीं थामे होता, वह अपने घर, अपने बच्चों की हँसी और माता-पिता की आँखों की प्रतीक्षा भी वहीं छोड़ आता है। सर्दी, गर्मी और बरसात उसके लिए मौसम नहीं, कर्तव्य की परीक्षा होते हैं। देश की शान उसके कदमों में और भारत की नींद उसकी आँखों की जाग में सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि हर दुआ, हर नमन और हर उम्मीद सबसे पहले उसी के नाम लिखी जाती है।
अंजू शर्मा ‘वशिष्ठ’ करनाल, हरियाणा हरियाणा है वीरों की धरती, शौर्य जहाँ की शान,रक्त में बसा पराक्रम, माथे पर अभिमान।मिट्टी यहाँ की महके वीरों के बलिदान से,हर दिल में गूँजे स्वर भारत माँ के गान से। पंडित लख्मीचंद की रागनी गूँजे, बनकर लोक कथाएं,नेकीराम शर्मा की वाणी, सच्चा पाठ सिखाए ।ऐसे वीरों की धरती ये,…