नया भारत: संकल्प, तिरंगा और बलिदान

डॉ. चेतन आनंद, ग़ाज़ियाबाद (उत्तर प्रदेश)

यही संकल्प लेते हैं, नया भारत बनाएँगे।
हमारे प्यार के दीपक, नया सूरज उगाएँगे।

बना है तीन रंगों से तिरंगा, मान है अपना,
हमें प्राणों से प्यारा है, नया अभिमान है अपना।
नमन इसको करें हर पल, झुकाएँ शीश हम अपने,
यही तो गर्व अपना है, यही सम्मान है अपना।

तिरंगे को सकल संसार में ऊँचा उठाएँगे।
यही संकल्प लेते हैं, नया भारत बनाएँगे। (1)

हमारे सैनिकों ने खून से इसको सदा सींचा,
जलाकर चेतना की लौ, अँधेरों से इसे खींचा।
चढ़े हैं फाँसियों पर, तो सहे ज़ुल्मों के सन्नाटे,
मगर भूले नहीं राहों से, चुनते ही रहे काँटे।

हम अपने प्राण देकर भी नया गुलशन सजाएँगे।
यही संकल्प लेते हैं, नया भारत बनाएँगे। (2)

हमेशा हम दिलों में एकता आबाद रखते हैं,
अतुल बल बाज़ुओं में है, जिगर फ़ौलाद रखते हैं।
हमें कमज़ोर मत समझो, हम अपने आज भी घर में
भगत सिंह, लाजपत, बिस्मिल, नए आज़ाद रखते हैं।

हम अपने देश को दुश्मन की नज़रों से बचाएँगे।
यही संकल्प लेते हैं, नया भारत बनाएँगे। (3)

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