देश संग खड़े रहो
“जब देश कठिन दौर से गुजरता है, तब छोटी-छोटी बचत भी बड़ा योगदान बन जाती है।
यह कविता एकजुटता, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की प्रेरक आवाज़ है।”

“जब देश कठिन दौर से गुजरता है, तब छोटी-छोटी बचत भी बड़ा योगदान बन जाती है।
यह कविता एकजुटता, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की प्रेरक आवाज़ है।”
यदि श्रीनगर में डल झील न होती तो शायद श्रीनगर की पहचान ही अधूरी रह जाती। ये झील न केवल कश्मीर की रूह है, बल्कि यहाँ की हाउस बोट और शिकारा सैर यात्रियों को एक अनोखा अनुभव देती है। लकड़ी की नक्काशीदार हाउस बोट, झील में तैरता मीना-बाजार, और शिकारे से होता हुआ रोमांचकारी सफर — यह सब मिलकर डल झील को स्वर्ग बनाते हैं।”