रीता मिश्रा तिवारी : शब्दों की साधिका

रीता मिश्रा तिवारी परिचय पुणे पुस्तक महोत्सव में रीताजी के साथ..साथ में उनके बेटा-बेटी और मेरी सहयोगी अलका घोड़ेला.

कुछ लोग केवल लिखते नहीं, बल्कि अपने शब्दों से जीवन, समाज और रिश्तों की धड़कनों को दर्ज करते हैं। रीता मिश्रा तिवारी ऐसी ही बहुमुखी प्रतिभा की धनी साहित्यकार हैं, जो कविता, कहानी, लघुकथा, संस्मरण और आलेख जैसी विविध विधाओं में निरंतर सृजनरत हैं। उनकी रचनाओं में समाज, संवेदना, रिश्ते, स्त्री मन, प्रकृति और जीवन के विविध रंगों का सुंदर चित्रण देखने को मिलता है। उन्होंने शिक्षण, संस्कार, संवेदना और साहित्य को एक सूत्र में पिरोकर समाज को सार्थक दिशा देने का सतत प्रयास किया है।
उनकी लेखनी में अनुभव की परिपक्वता, भावों की गहराई और समाज के प्रति सजग दृष्टि स्पष्ट दिखाई देती है। वे न केवल एक सफल साहित्यकार हैं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी हैं। रीता जी से मेरी पहचान फेसबुक के माध्यम से हुई।
जब मैंने अपना पोर्टल लाइव वॉयर न्यूज प्रारंभ किया था, तब मैं फेसबुक के जरिए अच्छे रचनाकारों और साहित्यकारों से जुड़ने का प्रयास कर रहा था। उन्हीं दिनों उनसे संपर्क हुआ और उन्होंने दिए गए व्हाट्सऐप नंबर पर अपनी रचना भेज दी। उस दिन के बाद से आज तक वे अपनी रचनाएँ नियमित रूप से भेज रही हैं।
हाल ही में उनकी धारावाहिक कहानी “अब क्या होगा” की समापन किश्त आई, तो लगा कि आज उनके बारे में ही लिखा जाए। यह कहानी बेहद उम्दा है। एक बार पाठक इसे पढ़ना शुरू करता है, तो अंत तक अद्भुत रोमांच के साथ बंधा रहता है।

बातचीत के दौरान पता चला कि रीता जी का बेटा-बेटी पुणे में नौकरी करते हैं, इसलिए उनका पुणे आना-जाना लगा रहता है। मेरी उनसे मिलने की इच्छा थी, लेकिन दूरी के कारण मुलाकात टलती रही।
फिर पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में पुस्तक महोत्सव आयोजित हुआ। मैंने उन्हें इसकी जानकारी दी। उन्होंने भी आने की इच्छा जताई, लेकिन शहर से अनभिज्ञ होने के कारण बच्चों की छुट्टी का इंतजार करती रहीं। आखिर शनिवार का दिन तय हुआ।

मैं भी पुस्तक महोत्सव पहुँचा। मेरे साथ मेरी सहकर्मी अलका घोड़ेला भी थीं। हम राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर उनका इंतजार कर रहे थे। वे आईं, थोड़ी देर हुई थी, जो स्वाभाविक था क्योंकि उनका घर आयोजन स्थल से काफी दूर था।

थोड़ी बातचीत हुई। उनका पूरा परिवार बहुत ही स्नेही और प्रेमपूर्ण लगा। मेरी इच्छा थी कि रुककर उनसे लंबी बातचीत करूँ, लेकिन ऑफिस जाना था। विदा लेते समय उन्होंने मुझे अपनी पुस्तक भेंट की। कुछ दिनों बाद वे भागलपुर लौट गईं.
हिंदी साहित्य जगत में उनका योगदान निस्संदेह उल्लेखनीय और प्रशंसनीय है। वे उन रचनाकारों में हैं, जिन्होंने शब्दों के माध्यम से समाज को नई दृष्टि, नई संवेदना और नई चेतना प्रदान की है।
रीता मिश्रा तिवारी का जन्म 12 दिसंबर 1967 को बिहार के ऐतिहासिक नगर भागलपुर में हुआ। उनके पिता श्री राम नारायण मिश्रा तथा माता स्वर्गीय चंद्रकना मिश्रा थीं। उनके पति स्वर्गीय रवि शंकर तिवारी थे।उन्होंने एम.ए. तथा बी.एड. की उपाधि प्राप्त की और शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। वर्तमान में वे सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं, किंतु शिक्षा और साहित्य से उनका जुड़ाव आज भी उतना ही मजबूत है।
वे आकाशवाणी भागलपुर से नियमित रूप से कहानी और काव्य पाठ करती रही हैं। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय ओपन माइक मंचों, फलक के किस्सा कहानी तथा कथा कस्तूरी यूट्यूब चैनल पर भी उनकी कविताएँ, कहानियाँ और नैरेशन सराहे गए हैं।
उनकी प्रमुख एकल कृतियाँ हैं अविता (कहानी संग्रह) प्रेम लौटता है (काव्य संग्रह) इसके अलावा अनेक साझा संकलनों में उनकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं, जिनमें दीपाली, पलाश, साहित्य अनुभव, अभिनव अनुभूति, काव्य धारा, बसंत आने को है, मुट्ठी में जुगनू आदि प्रमुख हैं। साथ ही साहित्य सुधा, कुमुदिनी, मधुशाला, काव्य कुंभ, महाकाल काव्य वृष्टि, वक्त की बातों में न आना, साहित्य एक नजर जैसे संकलनों में भी उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति रही है।
रीता जी साहित्य को केवल शब्दों का संयोजन नहीं मानतीं, बल्कि समाज का दर्पण समझती हैं। उनके अनुसार“साहित्य दुनिया और समाज का आइना है, जिसमें हर दौर के इतिहास का अक्स दिखाई पड़ता है।लेखन के साथ-साथ उन्हें पढ़ना-पढ़ाना, कुकिंग, बागवानी और कढ़ाई में विशेष रुचि है।
यह उनकी बहुआयामी प्रतिभा और सृजनशीलता का परिचायक है। रीता मिश्रा तिवारी केवल एक नाम नहीं, बल्कि संवेदनशील साहित्यिक चेतना की पहचान हैं। वे उन रचनाकारों में हैं, जिनकी लेखनी पाठकों के मन में गहरी छाप छोड़ती है। उनके शब्दों में अपनापन है, अनुभव है, समाज के प्रति जिम्मेदारी है और साहित्य के प्रति सच्ची निष्ठा है। ऐसे रचनाकार साहित्य जगत की अमूल्य धरोहर होते हैं।

5 thoughts on “रीता मिश्रा तिवारी : शब्दों की साधिका

  1. रीता जी की कहानी को पढ़ने की जिज्ञासा हो रही थी… अब कहानी के साथ-साथ उनको जानना भी सुखद अनुभव

    1. तहेदिल से बहुत बहुत धन्यवाद आपको मधु जी 🙏🌹♥️

    2. ये तस्वीर तो अविस्मरणीय पल है।जब तक सांस चलेगी तब तक साथ रहेगी।
      मेरे बारे में इतना सुंदर लिखा मुझे खुद से अवगत कराया धन्य हुई मैं सुरेश जी शुक्रिया बहुत बढ़िया, 👌 आपके लिए क्या कहूं धन्यवाद छोटा सा शब्द है बस हमारी दोस्ती में स्नेह बरकरार रहे।🙏🌹
      आपके विशिष्ट सकारात्मक और सराहनीय कार्य के लिए आपको बहुत बहुत ♥️ धन्यवाद 🙏💐

  2. ये तस्वीर तो अविस्मरणीय पल है।जब तक सांस चलेगी तब तक साथ रहेगी।
    मेरे बारे में इतना सुंदर लिखा मुझे खुद से अवगत कराया धन्य हुई मैं सुरेश जी शुक्रिया बहुत बढ़िया, 👌 आपके लिए क्या कहूं धन्यवाद छोटा सा शब्द है बस हमारी दोस्ती में स्नेह बरकरार रहे।🙏🌹
    आपके विशिष्ट सकारात्मक और सराहनीय कार्य के लिए आपको बहुत बहुत ♥️ धन्यवाद 🙏💐

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