इश्क़ का एक और रूप

मोबाइल पर देर रात बात करते हुए भावुक प्रेमी युगल, प्रेम और भरोसे का प्रतीकात्मक दृश्य। मोबाइल पर देर रात बात करते हुए भावुक प्रेमी युगल,

मौसमी चंद्रा, पटना

उस शाम उसका मन जाने क्यों उदास था।

कोई बड़ा कारण नहीं था, फिर भी मन अपने ही बोझ तले दबा जा रहा था।

किसी से बात करने का जी हो रहा था। बहुत देर तक उसने मोबाइल हाथ में लिए रखा। कई नाम सामने आए, पर उँगली हर बार एक ही नाम पर जाकर ठहर जाती।

आख़िर उसने सिर्फ इतना टाइप किया—”बात करनी है… अगर फ्री हो तो!”

मैसेज भेजते ही उसे पछतावा हुआ। वह जानती थी कि वह बहुत व्यस्त रहता है। दिनभर कोई न कोई मीटिंग चलती ही रहती है, चाहे ऑनलाइन हो या ऑफलाइन।

लेकिन अगले ही पल फोन बज उठा।

“क्या हुआ? सब ठीक?” उसकी आवाज़ में चिंता थी।

“कुछ नहीं…”

“तुम्हारा ‘कुछ नहीं’ हमेशा बहुत कुछ होता है। बताओ जल्दी।”

बस इतना सुनना था कि उसकी आँखें भर आईं। शब्द अटक गए। थोड़ी देर वह चुप रही और दूसरी तरफ़ भी कोई जल्दी नहीं थी। वह उसकी ख़ामोशी सुनता रहा, जैसे दुनिया में वही सबसे ज़रूरी बात हो।

कुछ देर बाद उसने धीमे-धीमे अपने मन की सारी गिरहें खोल दीं—कुछ नया शुरू करने से पहले का डर, गुज़र चुके कल की पीड़ा, निश्चित-अनिश्चित की सारी फाँस।

सुनते हुए वह कहता रहा—”तुम जितना सोच रही हो, उससे कहीं ज़्यादा मज़बूत हो।”
“थोड़ा आराम करो।”
“मैं हूँ न…”

उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी सच्चाई झलकती थी, जो टूटे हुए मन को जोड़ना जानती थी।

बात खत्म होने के बाद उसने सहज ही पूछ लिया—”सच्ची-सच्ची बताओ, तुम वाकई फ्री थे या…?”

दूसरी तरफ़ हल्की-सी हँसी गूँजी।

“नहीं।”

“फिर?”

“एक ज़रूरी प्रेज़ेंटेशन है आधे घंटे बाद। उसी की फाइनल तैयारी में लगा था। फ़ोन देखा तो तुम्हारा मैसेज… बाकी सब इंतज़ार कर सकता था… तुम नहीं।”

वह कुछ पल बिल्कुल चुप रह गई।

उसे अचानक पिछले कई महीने याद आ गए। कितनी बार उसने उसी के संदेश देर से पढ़े थे। कई बार सिर्फ दो शब्द लिखकर भेज दिए थे—”बिजी हूँ।” “पढ़ने बैठी हूँ।” और कितनी बार तो यह भी कहा था—”लिखने बैठी हूँ, डिस्टर्ब करोगे तो ब्लॉक कर दूँगी तुम्हारा नंबर।”

कितनी बार उसकी कॉल बाद में करने का वादा करके वह भूल भी गई थी।

और उधर…

जब भी उसने पुकारा, उसने कभी यह नहीं कहा—”फ्री होकर कॉल करता हूँ।” न ही उसका मैसेज देर तक अनसीन रहा।

उसने सिर्फ इतना जाना कि उसे उसकी ज़रूरत है।

उस रात पहली बार उसे समझ आया कि प्रेम लंबे संदेशों, महँगे उपहारों या हर रोज़ “आई लव यू” कह देने भर से नहीं होता।

प्रेम शायद उस क्षण जन्म लेता है, जब कोई अपनी दुनिया की सबसे ज़रूरी चीज़ों को कुछ देर के लिए किनारे रखकर किसी के बिखरते हुए मन को थाम ले।

जब कोई किसी की आवाज़ सुनने के लिए घड़ी न देखे।

और जब कोई किसी से बात करने के लिए बेवजह दो किलोमीटर एक्स्ट्रा वॉक कर ले।

वॉक की बात याद आई तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

उसने वापस फोन उठाया और टाइप किया—

“सो गए क्या?”

नीली टिक नहीं लगी। उसने दूसरा मैसेज टाइप किया—

“सुबह पढ़ लेना, पर मुझे लिखना है, इसलिए लिख रही हूँ। फिर भूल गई तो! हाँ, तो सुनो! जानते हो, अगर हम किसी का समय माँगते हैं, तो दरअसल उसके जीवन का एक हिस्सा माँगते हैं। तो कितना कीमती हुआ न समय! और तुमने हर बार बिना कोई हिसाब लगाए अपना यह कीमती हिस्सा मुझे दिया है। जब भी मैं टूटी, तुमने अपने सारे ज़रूरी कामों के बीच मेरे लिए एक जगह बचाकर रखी। शायद प्रेम वही है, जहाँ कोई व्यक्ति तुम्हारी आवाज़ सुनते ही दुनिया की आवाज़ को म्यूट कर दे।”

संदेश भेजकर उसने मोबाइल तकिए के पास रख दिया और सोने की कोशिश करने लगी।

कुछ देर बाद फ़ोन की घंटी बजी।

उधर से वही परिचित आवाज़ आई—

“सो गई थी?”

वह मुस्कुराई।

“नहीं।”

उसने धीरे से कहा—

“एक बात पूछूँ?”

“हूँ।”

“जब तुम्हें दुनिया में सबसे ज़्यादा अकेलापन महसूस होता है, तब सबसे पहले याद किसकी आती है?”

उसने आँखें बंद कर लीं। उत्तर उसके पास बहुत पहले से था, बस उसने कभी स्वीकार नहीं किया था। आज स्वीकार किया—

“तुम्हारी।”

“ह्म्म्म! ये तो हुई तुम्हारी बात। जानती हो, जब मुझे लगता है कि मैं हार रहा हूँ, तब मैं भी तुम्हें ही ढूँढ़ता हूँ। सोचो, इस पूरी दुनिया में मुझे सिर्फ तुम्हारा ठिकाना याद आता है। समझ रही हो न, कितनी स्पेशल हो तुम!”

उसकी आँखों से एक बूँद चुपचाप तकिए पर गिर पड़ी।

यह दुख का आँसू नहीं था। आँसुओं के भी अनेक रंग-रूप होते हैं। हमें केवल उन रंगों को पहचानना होता है। जैसे एक चेहरे के कई रूप होते हैं, वैसे ही उस चेहरे को पहचानना भी ज़रूरी है जो तुम्हारे आँसू देखकर मुरझा जाए और तुम्हारी हँसी देखकर खिल उठे।

भाग्यशाली होते हैं वे लोग, जो ऐसे प्यारे लोगों को समेटकर रख पाते हैं, उन्हें टूटते तारों की तरह ओझल नहीं होने देते।

आपके पास भी कोई ऐसा हो, तो उसे अपनी ज़िंदगी से कभी जाने मत दीजिए।

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